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बंथर में बनाई गई आधा किमी की सड़क का प्रयोग सफल रहा

वह दिन दूर नहीं जब आपके तेज रफ्तार वाहन चमड़े की सड़कों पर दौड़ेंगे। इसे अंजाम दिया है आईआईटी, कानपुर के वैज्ञानिकों और शहर के चर्म निर्यातकों ने। आईआईटी अब इंडियन रोड कांग्रेस को रिपोर्ट भेजेगी जिसके बाद इस नई तकनीक को अपनाया जा सकता है। ऐसी सड़कें चमड़े के वेस्ट (अनुपयोगी) से तैयार की जाएँगी। यह वेस्ट ‘खतरनाक’ माना जाता है। अभी तक इसे विशेष पिट्स का निर्माण कर उसमें डम्प किया जाता है जिससे जमीन बर्बाद हो रही है।

चमड़ा तैयार करने के दौरान टनों ऐसी कतरन आदि निकलती है जिसे सेहत के लिए खतरनाक माना जाता है। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति लेने के बाद प्रीजर्व किया जाता है। बंथर में ऐसे कई पिट्स (गड्ढ़े) तैयार किए गए हैं, जिसमें इस वेस्ट को फेका जाता है।

इन गड्ढों में पहले प्लास्टिक की कवरिंग की जाती है और फिर इस वेस्ट को डाला जाता है। इससे वहाँ की जमीन खराब हो रही है। इसका विकल्प ढूंढने के लिए चर्म निर्यात करने वाली देश की बड़ी कंपनियों में एक मिर्जा इंटरनेशनल के चेयरमैन इरशाद मिर्जा ने आईआईटी से सम्पर्क किया था।

आईआईटी को इसके वैकल्पिक इस्तेमाल के लिए शोध करने को कहा गया था। इससे पहले आईआईटी, श्री मिर्जा के साथ समझौता कर अब तक बनने वाली लकड़ी की काठी को फाइबर की काठी में बदलने में सफल हो चुका है।

मिर्जा इंटरनेशनल के चेयरमैन मिर्जा ने बताया कि इस वेस्ट में क्रोमियम तो नहीं होता है, फिर भी यह कहा जाता है कि यदि इससे होकर पानी  गुजरता है तो संभव है कि कृषि योग्य भूमि को नुकसान पहुँचाए। इसके लिए आईआईटी, कानपुर ने अपने स्तर पर शोध किया है। विशेष बात यह है कि इसकी बंधन क्षमता अधिक होती है और संभव है कि यह आगे सीमेंट को भी रिप्लेस कर दे।

बंथर में एक साल पहले आधा किमी की सड़क तैयार की गई थी, जो प्रयोग में सफल रही है। इसका उपयोग हाईवे तैयार करने में किया जा सकता है क्योंकि हाईवे ऊँचाई पर होते हैं और इससे आसपास की जमीन को भी किसी रूप में खतरा संभव नहीं है। आईआईटी के गोल्डन जुबली समारोह में निदेशक संजय गोविन्द धांडे के साथ इस पर चर्चा हो चुकी है। संस्थान रिपोर्ट फाइनल होने तक इस पर अधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।

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  • Web Title:चमड़े की सड़कों पर दौड़ेंगे वाहन