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गौला मामले में प्रदेश शासन लेट-लतीफ

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रलय गौला, कोसी, शारदा, दाबका और किरोड़ा नाले में खनन की इजाजत देने के लिए तैयार है पर उत्तराखंड शासन की लेटलतीफी के कारण इन पांचों नदियों के खुलने में देरी हो रही है। दिलचस्प तथ्य यह है कि शासन की लापरवाही के कारण खान अधिकारी जैसे अदना अधिकारी ने वन विकास निगम के खनन के लिए कार्यदायी एजेंसी होने के प्रमाण पत्र बनाने में पूरा एक माह लगा दिया।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रलय ने वन विकास निगम से पांचों नदियों में अपने कार्यदायी संस्था होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने हल्द्वानी में पिछले माह गौला तीन दिन में खुलवाने की घोषणा की थी। जब सीएम हल्द्वानी में तीन दिन में गौला खुलवाने की घोषणा कर रहे थे, तब तक खान अधिकारी निगम के कार्यदायी एजेंसी होने का प्रमाणपत्र नहीं बना पाए थे। जबकि उनके लिए यह बेहद आसान काम था।

शासन की इसी उदासीनता के चलते प्रमाण-पत्र बनने में इतनी देर लगी और मंत्रलय के अधिकारी गौला समेत पांचों नदियों में खनन की इजाजत समय से नहीं दे पाये। इस वजह से 23 दिसम्बर को होने जा रही मंत्रलय इम्पावर कमेटी की बैठक में गौला नदी के मुद्दे पर विचार विमर्श नहीं हो पायेगा।

निगम के एमडी अनिल कुमार दत्त ने बताया कि वह अभी दिल्ली में मंत्रलय के अधिकारियों से बातचीत करके लौटे हैं। सीएम की हर तीसरे दिन केंद्रीय पर्यावरण मंत्रलय जयराम रमेश से बातचीत हो रही है। खान अधिकारी ने एक-दो रोज पहले निगम के खनन की कार्यदायी संस्था होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है।

यह अब अनुमोदन के लिए मंत्रिमंडल को गया है। यहां से अनुमोदन में भी कम से कम दो दिन लगेंगे। प्रमाण पत्र अनुमोदित होते ही इसे वह खुद दिल्ली ले जाकर पर्यावरण मंत्रलय के अधिकारियों को सौंपेंगे। उसके बाद गौला खुलने की घोषणा हो जाएगी।

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