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अनाज घोटाले में सीबीआई ने नौ को जेल भेजा

बलिया में वर्ष 2003 से 2005 के बीच हुए अनाज घोटाले में सीबीआई की लखनऊ यूनिट ने मंगलवार को मेरठ विकास प्राधिकरण के वित्त नियंत्रक सत्येन्द्र सिंह गंगवार, दो जिला पंचायत सदस्य व एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य समेत नौ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। ‘काम के बदले अनाज’ योजना के तहत आठ करोड़ के इस घपले में बलिया में तैनात रहे कई पीसीएस व आईएएस स्तर के अधिकारियों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है।

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक पीलीभीत में हुए अनाज घोटाले की जाँच भी अब अंतिम दौर में पहुँच गई है और इसमें कई बड़े अफसरों पर कार्रवाई होने की संभावना है। राज्य सरकार पहले ही यह कह चुकी है कि पिछली सरकार के शासनकाल में यूपी में 35 हजार करोड़ रुपए का घोटाला हुआ था।

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार लोगों पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। एक दिन पहले ही सीबीआई सत्येन्द्र गंगवार को मेरठ से और बाकी लोगों को बलिया में अपनी गिरफ्त में ले चुकी थी।

गिरफ्तार लोगों में डीआरडीए के जूनियर एकाउंट क्लर्क अशोक उपाध्याय, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अच्छेलाल यादव, दलाल रामायण यादव, तेज सिंह, ब्रह्मेश्वर पाठक, नाजिमुद्दीन अंसारी और हीरानंद वर्मा आदि शामिल हैं। गंगवार पहले बलिया डीआरडीए में तैनात रहे हैं।

पहले इस मामले की जाँच सीबीसीआईडी, ईओडब्लू व एसआईटी भी कर चुकी हैं। बाद में हाईकोर्ट के दखल के बाद इस मामले की जाँच सीबीआई को दी गई थी।। सीबीआई ने डीआरडीए के वित्त व लेखाधिकारी सतेन्द्र कुमार गंगवार, जिला पंचायत के पूर्व सदस्य अक्षय लाल यादव, जिला पंचायत सदस्य मुन्ना मौर्य व तेगा सिंह को बयान दर्ज कराने के लिए लखनऊ बुलाया था।

सूत्रों की मानें तो वे लोग कई बार अपना बयान देने के लिए लखनऊ गए और वापस आ गए। इस लिहाज उन्हें गिरफ्तारी का अंदेशा नहीं था लेकिन सोमवार को सीबीआई ने सभी को गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने करीब सौ से अधिक लोगों को घोटाले में सीधे-सीधे जिम्मेदार माना है जिनकी गिरफ्तारी भी तय है।

इनमें घोटाले के दौरान सीडीओ बलिया के पद पर तैनात रहे कई पीसीएस व आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं। कुछ मिल मालिकों व स्थानीय नेताओं के गठजोड़ पर भी सीबीआई की नजर है।

क्या है घोटाला


पंचायत के पदाधिकारी मनमाफिक विकास योजना को पंचायत में स्वीकृत करा लेते थे। हकीकत में न काम होता था और न मजदूर लगाए जाते पर फर्जी लिस्ट बनाकर अनाज का वितरण दिखाया जाता। इस अनाज को खुले बाजार में, पड़ोसी राज्यों को और मिल मालिकों को बेचा जाता था।

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक यूपी के तकरीबन हर जिले में हुए इस घोटाले में पंचायत से लेकर सीडीओ दफ्तर और खाद्य विभाग से जुड़े शासन के अधिकारी तक कहीं न कहीं इस रैकेट मे शामिल रहे। हालाँकि जहाँ तक इस मामले में फँसने की बात है तो सीबीआई के पंजे सीडीओ दफ्तर से ऊपर पहुँचते नहीं दिखते।

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