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लिया एकचाुटता का संकल्प

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को राजधानी में कई आयोजन हुए। इसमें महिलाओं ने एकाुटता का संकल्प लिया।सेंट्रल लाइब्रेरी हॉल में रांची यूनिवर्सिटी के वीमेंस स्ट्डीा सेंटर एवं एनएसएस द्वारा आयोजित सेमिनार में शिक्षा सचिव मृदुला सिन्हा ने कहा कि महिलाओं की दोहरी जीवनशैली से उनमें तनाव बढ़ रहा है। रूढ़ीवादी मान्यताएं उनका जीवन कठिन बना रही हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता रांची विवि के वीसी प्रो एए खान ने की। सेमिनार को मनोविज्ञान एचओडी डॉ शहिद हसन, रिनपास के मनोचिकित्सक डॉ केएस सेंगर, सुजाता गुप्ता, डॉ राजकुमारी झा ने भी विचार व्यक्त किये।एआइएमएसएस द्वारा अल्बर्ट एक्का चौक के निकट आयोजित सभा के मुख्य अतिथि एमके हसन ने कहा कि कलुषित वातावरण में महिलाओं को कुसंस्कृति और कुरीतियों की श्रंखला तोड़नी होगी। केया डे, शालिनी संवेदना, विमला देवी, शशि भूषण पाठक, सिद्धेश्वर सिंह और प्रशांत कुमार ने भी मौके पर अपने विचार व्यक्त किये।ड्ढr सामुदायिक खाद्य एवं पोषाहार विस्तार इकाई और अपर्ण संस्था की ओर से चिरौंदी में महिला दिवस पर पोषण प्रदर्शनी आयोजित हुई। इसका उद्घाटन रांची विश्वविद्यालय की गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उर्मिला सिन्हा ने किया।ड्ढr बंगीय सांस्कृतिक परिषद् सभागार में हुई कार्यशाला में डॉ कुमुद ने घरलु हिंसा अधिनियम पर अपने विचार रखे। मौके पर अनामिका, अधिवक्ता वंदना सिंह ने भी महिला आरक्षण पर अपने विचार रखे। इधर महिला उत्पीड़न विरोधी एवं विकास समिति के तत्वावधान में रैली निकाली गयी। रैली का नेतृत्व माला घोष ने किया। सम्मेलन का समापन : विस्थापन विरोधी संघर्ष और महिलाओं की भूमिका विषयक दो दिवसीय सम्मेलन का समापन रविवार को हुआ। इस अवसर पर महिलाओं ने बहू बजार क्षेत्र में रैली का आयोजन कर एकाुटता के नार लगाये गये। अंतिम दिन शशि बारला ने विषय प्रवेश कराते हुए महिलाओं को राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में अहम भूमिका निभाने की बात कही। दूसर सत्र में महिला सशक्तीकरण पर महिलाओं ने कई गीत प्रस्तुत किये। घरलु हिंसा की फर्स्ट स्टेप है दहेा प्रथा : आइजी एसटीएफ डीके पांडेय ने कहा है कि दहेा प्रथा घरलू हिंसा की फर्स्ट स्टेप है। महिलाएं ही महिलाओं की दुश्मन बन जाती हैं। इस पर सभी वर्ग के लोगों को सोचने की जरूरत है। वह रविवार को ह्यूमन फाउंडेशन रांची शाखा के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। डीसीपी राजीव रांन, डिस्ट्रीक लीगल सर्विसेस ऑथोरिटी के सेक्रेटी वी बनर्जी, जीके रॉय, डीएन उपाध्याय ने भी अपने विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन संस्था की डायरक्टर ममता पांडेय ने किया। इधर महिला दिवस पर महिला प्रोबेशन होम में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सूचना आयुक्त गंगोत्री कुाूर ने की। महिला समाज दर्पण संस्थान ने महिलाओं के उत्थान के लिए काम करने का निर्णय लिया। कांके ब्लॉक में साक्षरता मिशन ने महिला दिवस पर महिला स्वयं सहायता समूह को पुरस्कृत किया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर वीमेंस टास्क फोर्स झारखंड की संयोजक शालिनी संवेदना ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। इसमें महिलाओं को आजीविका के अधिकार की गारंटी देने, लघु वन उत्पादों पर महिलाओं के सामूहिक अधिकार की गारंटी सहित 14 सूत्री मांगों का जिक्र किया गया है। आदिवासी ओलंपिया की ओर से संत पॉल मध्य विद्यालय सभागार में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यहां मार्ग्रेट दयाल ने कहा कि शहरी क्षेत्र की महिलाएं किसी भी मामले में पुरुषों से पीछे नहीं, लेकिन अशिक्षा और पलायन के कारण ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं पीछे छूट रही हैं। महिलाएं आज कमजोर नहीं हैं : लक्ष्मी महिलाएं आज किसी स्थिति में कमजोर नहीं हैं। स्वस्थ समाज की रचना में महिलाओं की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। उक्त बातें झारखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष लक्ष्मी सिंह ने कहीं। श्रीमती सिंह रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर झारखंड कल्याण बोर्ड के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। सम्मेलन का आयोजन एसडीसी सभागार में किया गया था। कल्याण बोर्ड के सचिव अनुप भट्टाचार्य ने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण के बगैर समाज का विकास नहीं हो सकता। कुतुबुद्दीन ने कहा कि महिलाओं का तिरस्कार कर सभ्य समाज की कल्पना संभव नहीं है।

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