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हिंदी अनुवाद के बाद लिब्रहान रिपोर्ट पर चर्चाः सरकार

हिंदी अनुवाद के बाद लिब्रहान रिपोर्ट पर चर्चाः सरकार

सरकार ने मंगलवार को इस आरोप को गलत बताया कि वह बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की जांच करने वाले लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट पर संसद में चर्चा कराए जाने से कतरा रही है।

सरकार ने कहा कि विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी और सपा नेता मुलायम सिंह यादव की सहमति से ही इस रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद होने तक इसे स्थगित किया गया है।

मंगलवार को इस विषय पर निर्धारित चर्चा स्थगित किए जाने से खिन्न कम्युनिस्ट पार्टी के गुरूदास दासगुप्ता ने लोकसभा में आरोप लगाया कि सरकार चर्चा कराने की इच्छुक नहीं है। उन्होंने कहा कि इस चर्चा की शुरूआत उन्हें करनी थी, लेकिन सुबह ही उन्हें फोन पर बताया गया कि चर्चा स्थगित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह चर्चा कराना भी चाहती है या नहीं।

अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि चर्चा स्थगित किए जाने का फैसला अध्यक्ष का है और आसन के फैसले पर सवाल नहीं किया जा सकता है। संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने गुरूदास दासगुप्ता के इन आरोपों को पूरी तरह अवांछित बताया कि सरकार आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा कराने की इच्छुक नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार रिपोर्ट पर चर्चा कराने को पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार तो उसी दिन चर्चा कराने को तैयार थी जिस दिन रिपोर्ट सदन में पेश की गई। 

बंसल ने कहा कि सोमवार को सपा नेता मुलायम सिंह स्पीकर के पास आए थे और चर्चा नहीं कराने की अपील की थी। विपक्ष के नेता से भी पूछा गया था। बाद में इस बात पर सहमति बनी थी कि रिपोर्ट की हिंदी प्रति मिलने के बाद ही चर्चा कराई जाएगी। बंसल ने कहा कि हिंदी अनुवाद जल्द से जल्द कराने का प्रयास किया जा रहा है और जब यह सदस्यों को मिल जाएगा तो चर्चा कराई जाएगी।

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