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देश का सर्वाधिक वांछित उग्रवादी अभी भी रेल कर्मचारी

देश का सर्वाधिक वांछित उग्रवादी अभी भी रेल कर्मचारी

देश के सर्वाधिक वांछित उग्रवादियों में एक परेश बरुआ पिछले तीन दशकों से कार्यालय नहीं जाने के बावजूद अभी तक केंद्र सरकार का कर्मचारी बना हुआ है।

यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के स्वयंभू कमांडर बरुआ को वर्ष 1978 में 21 वर्ष की उम्र में खेल कोटे के तहत पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में नौकरी मिली थी। वह पूर्वी असम के तिनसुकिया रेल मंडल का फुटबॉल खिलाड़ी था।

रेलवे में बरुआ के साथ ही नौकरी की शुरुआत करने वाले सुप्रियो चौधरी ने बताया, ''हमने एक साथ पोर्टर के पद पर 370 रुपये महीने के वेतन पर नौकरी शुरू की। बरुआ फुटबॉल अभ्यास में गंभीरता से हिस्सा लेता था। जनवरी 1980 के बाद वह नहीं दिखा।''

बरुआ अब अब 52 वर्ष का हो चुका है। उसने अप्रैल 1979 में पांच अन्य लोगों के साथ उल्फा की स्थापना की। इनमें उल्फा का स्वयंभू प्रमुख अरबिंद राजखोवा भी शामिल था।

माना जा रहा है बरुआ और राजखोवा दोनों बांग्लादेश से संगठन का संचालन कर रहे हैं। यद्यपि नई खुफिया जानकारी में कहा गया है कि शरण के लिए बरुआ के चीन जाने की संभावना है।

तीन दशकों से कार्यालय नहीं आने के बावजूद बरुआ का नाम अभी भी एक कर्मचारी के रूप में रेलवे के रजिस्टर में दर्ज है।

तिनसुकिया मंडल के उप रेल प्रबंधक संजॉय मुकर्जी ने कहा, ''परेश बरुआ का नाम महत्वपूर्ण है और वह पिछले तीन दशक से अनुपस्थित है। उसका वेतन शून्य है लेकिन दस्तावेजों के अनुसार वह अभी भी कर्मचारी है।''

उन्होंने कहा कि इस बात की जांच की जा रही है कि रेलवे के रिकार्ड में दर्ज परेश बरुआ उल्फा नेता परेश बरुआ ही है। रेलवे के पास उसका कोई फोटो नहीं है और दस्तावेजों को प्रमाणित करना अब कठिन है।

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