class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गैस त्रासदी से मिली बीमारी ने तोड़ी रिश्तों की डोर

गैस त्रासदी से मिली बीमारी ने तोड़ी रिश्तों की डोर

लाल जोड़े में सजकर गई प्रमिला शर्मा की इच्छा भी खुशहाल जीवन जीने और सपनों का संसार बसाने की थी। मगर उसकी यह इच्छा यूनियन कार्बाइड से निकली गैस के कारण पूरी नहीं हो पाई। इस दुर्घटना के कारण मुफ्त में मिली बीमारी ने उसकी दुनिया उजाड़ कर रख दी है और वह खुद को ठगा-सा महसूस करती है।

यूनियन कार्बाइड संयंत्र के ठीक सामने स्थित जेपी नगर की रहने वाली प्रमिला आज भी अपनी उजड़ चुकी दुनिया को याद कर रो पड़ती है। वह जब लगभग दस साल की थी, तभी यूनियन कार्बाइड से रिसी गैस ने भोपाल में जमकर तबाही मचाई थी। सबसे ज्यादा मौतें इसी बस्ती हुई थीं।

वक्त गुजरने के साथ प्रमिला पर भी बीमारी ने अपना असर दिखाया। इसके बावजूद प्रमिला जब 18 वर्ष की उम्र पार कर गई तो उसकी शादी गंजबासौदा में हुई। पति बिजली विभाग मे काम करता था और जिंदगी सामान्य रूप से चल रही थी।

वह बताती है कि शादी के कुछ माह तक तो सब ठीक ठाक चला, मगर बढ़ती खांसी और आंखों की जाती रोशनी के कारण बार-बार इलाज कराना पड़ा। इलाज पर होने वाले खर्च के कारण ससुराल के लोगों ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं उसे यूनियन कार्बाइड से रिसी गैस से बीमारी होने के ताने भी मिले। आखिर में उसे इलाज कराने के नाम पर मायके भोपाल भेज दिया गया।

इलाज के लिए भोपाल भेजी गई प्रमिला फिर कभी अपनी ससुराल गंजबासौदा नहीं लौट पाई। उसे बाद में तलाक तक दे दिया गया। प्रमिला बताती है कि वह एक तरफ बीमारी से जूझ रही है तो दूसरी ओर 18 वर्षीय बेटे प्रदीप की पढ़ाई का भार उसके ऊपर है। उसे मुआवजे में सिर्फ 25 हजार रुपये ही मिले हैं। इससे अधिक राशि तो वह अपने इलाज पर खर्च कर चुकी है। वह किसी तरह मजदूरी कर अपना जीवन चला रही है।

प्रमिला बताती है कि जेपी नगर में अकेली वही ऐसी लड़की नहीं है, जिसे यूनियन कार्बाइड से रिसी गैस से मिली बीमारी की सजा तलाक के रूप में मिली है। कई और लड़कियां है जो मायके में रहकर अपना जीवन गुजार रही हैं। उनके सामने समस्या यह है कि वे अपना दर्द किसे सुनाएं, क्योकि मां-बाप अगर जिंदा भी हैं तो वे खुद अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:गैस त्रासदी से मिली बीमारी ने तोड़ी रिश्तों की डोर