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12 अगस्त, 2020|2:21|IST

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खतरा गहराया मगर लापरवाही बढ़ी

पूरी दुनिया में एड्स का खतरा गहराया है लेकिन हैरत की बात यह है कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता खत्म कर देने वाले इस लाइलाज रोग का डर लोगों में पहले सा नहीं दिखता और मरीज तक इलाज में लापरवाही बरतते हैं।

देश में एचआईवी/एड्स के लगभग 25 लाख मरीज हैं। दुनिया भर में भारत तीसरा बड़ा देश है जहां इतनी अधिक संख्या में एचआईवी/एड्स के मरीज हैं। भारत से अधिक दक्षिण अफ्रीका में 57 लाख और नाइजीरिया में 26 लाख इसके मरीज हैं। वैसे विश्व भर में इसके मरीजों की संख्या तीन करोड़ 35 लाख है।

देश में कुल मरीजों का 39.3 प्रतिशत मरीज महिलाएं हैं। कुल मरीजों का 86.5 प्रतिशत हिस्सा 15 से 49 वर्ष का है। इनमें से 27.9 प्रतिशत 15 से 29 और 58.6 प्रतिशत 30 से 49 वर्ष के बीच के हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि मरीजों की आधी से अधिक संख्या जवान लोगों की है। देश की आबादी का 0.3 फीसदी हिस्सा एड्स/एचआईवी से पीड़ित है।

राजधानी दिल्ली में एड्स/एचआईवी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के मुताबिक दिल्ली में 35 हजार लोग एचआईवी से संक्रमित हैं। देश भर जिन 6607 एड्स के मरीजों का पता चला है उनमें से 286 मामले दिल्ली के हैं।

यह एड्स के कुल मरीजों का चार प्रतिशत है। एड्स के हिसाब से महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मणिपुर के बाद दिल्ली चौथे स्थान पर है।

उत्तर प्रदेश, बिहार,  राजस्थान जैसे बड़े राज्यों की भी तुलना में दिल्ली में एड्स के अधिक मरीज हैं।
दिल्ली में एड्स का पहला मामला 1988 में प्रकाश में आया था। दिल्ली में 1993 में एक हजार आबादी पर 2.25 लोग एचआईवी से संक्रमित थे जो 1996 में बढ़कर 12.53 और 1997 में बढ़कर 13.15 हो गए।

 

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