DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आज है सिद्ध रात्रिआज है सिद्ध रात्रि

रांची। होली का वैदिक और सामाजिक महत्व भी है। वैदिक परम्परा के अनुसार होली एक दारुण रात्रि है। इस दिन सत्य विश्वास और ईश्वर के प्रति आस्था की जीत हुई है। इस दिन होलिका और डुण्ढा राक्षसी को सद्गति की प्राप्ति हुई। वहीं भगवान कृष्ण की नगरी में डुण्ढा राक्षसी के मृत्यु के बाद होली खेलने का प्रमाण मिलता है। यह रात्रि दारुण रात्रि होने के कारण सिद्ध रात्रि कहलाती है। आज के दिन जप, तप, दान का फल अनंत मिलता है। जो व्यक्ित जिस भी कामना से आज मंत्रों का जप करता है वह मंत्र सिद्ध हो जाता है। होलिका महाष्टमी, संक्रांति और दीपावली की रात्रि का महत्व तंत्र साधना में सर्वाधिक है। आज के दिन होलिका के आग में चना, जौ, गेहूं, पीली सरसों (कच्ची डाली), मिठाई, भोग लगाना चाहिए। भोग से शेष बचे सभी प्रसाद को घर के सभी परिजनों से बांट कर खाना चाहएि। मान्यता है कि इस तरह करने से सालों भर घर में सुख शांति बनी रहती है। आज के दिन होली के देवता भगवान नरसिंह के साथ भक्त प्रहलाद की पूजा की जानी चाहिए। भगवान नरसिंह के मंत्र का जप एक सौ आठ बार जपना चाहिए। रात्रि में अपने गुरु या इष्ट के मंत्र का जप करं। होली के दिन प्रात: काल पुन: अगजा के भष्म को तीन बार बायें हाथ से उठा कर माथे पर तिलक लगाना चाहिए। इसके बाद स्नान कर देव मंदिरों में देवताओं एवं पितरों के प्रति प्रिय भोजन का भोग लगाकर रंग-गुलाल अर्पित कर स्वयं भी रंग-गुलाल इस भावना से खेलना चाहिए कि आज की तरह पूर साल हर्ष उल्लास मौज-मस्ती बनी रहे।ड्ढr पं. रामदेव पांडेय

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: आज है सिद्ध रात्रिआज है सिद्ध रात्रि