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एजेंट को किश्त देते ही बीमा शुरू

अब किसी से बीमा कंपनी यह नहीं कह सकती कि प्रीमीयम की किस्त उसे देर से मिली है इसलिए दावे की राशि पर विचार नहीं किया जाएगा। बीमा धारक जिस दिन अपनी किस्त एजेंट को सौंप देता है उसे उसी दिन से जमा माना जाएगा और उसी दिन से बीमे का दावा प्रभावी हो जाएगा। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने यह फैसला देते हुए बीमा कंपनी की अपील खारिा कर दी और मोटर दुर्घटना में मार गए व्यक्ित की विधवा को पूरे क्लेम के साथ छह फीसदी ब्याज देने का आदेश दिया है। अयोग के अध्यक्ष जस्टिस अशोक भान और बीके तैमिनी ने साथ ही यह व्यवस्था भी दी कि बीमा कंपनी बीमा पालिसी में कोई ऐसी शर्त नहीं लगा सकती जो बीमा नियमों (धारा-64) के खिलाफ हो। दावेदार बिनाका त्रिपुरा के वकील राजकुमार गुप्ता ने बताया कि बिनाका के पति ने जनता पर्सनल पालिसी ली थी जिसका प्रीमियम उन्होंने 2अगस्त 02 को एजेंट को सौंप दिया। एजेंट ने यह पैसा एक माह के बाद जमा किया। इसके बाद कंपनी ने 23 सितंबर को बीमा का सर्टिफिकेट जारी किया। इस दौरान 13 अक्तूबर को बीमा धारक की सड॥क द़ुर्घटना में मृत्यु हो गई। कंपनी में जब बीमा क्लेम का दावा किया गया तो कंपनी ने कहा कि पालिसी की शर्तों के अनुसार सर्टिफिकेट जारी होने के एक माह बाद ही दोवे पर विचार किया जाता है। उपभोक्ता आयोग ने इस शर्त को धारा 64 के विपरीत पाया और कहा कि ग्राहक पर लगाई गई यह शर्त अवैध है।

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