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14 नबम्बर, 2019|2:03|IST

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सफलता की कुंचाी

अर्ल नाइटिंगैल न कहा था ‘मूल्यवान लक्ष्य को निरन्तर पाते रहन का नाम सफलता है’। यह केवल लक्ष्य या मंजिल नहीं, एक सफर है। लक्ष्य प्राप्ति के बाद ठहर जाना सफलता का अंत है। लक्ष्य मिलने पर एक सुखद अनुभव होता है, सफलता इसी अनुभूति का विषय है। यदि हमारा लक्ष्य ऊंचा और उत्कृष्ट है, तो सफलता भी उतनी ही महान और पावन होगी। परन्तु सफलता की कहानी पूर्णता और संतोष के बिना अधूरी है। किसी भी क्षेत्र में सफलता पान के लिए जरूरी है- उद्देश्य, सिद्धान्त, योजना, अभ्यास, सतत् प्रयास, धैर्य और गर्व। ऐसा करने में कई बार गलतियां भी हो जाती हैं, जिससे सीख लेकर भूल सुधारी जा सकती है। किसी भी त्रुटि एवं भूल को सुधारन का सबसे अच्छा तरीका है, अपनी गलती स्वीकार कर लेना, उस पर अड़े न रहना, उससे सीखना, उसे दुहराया न जाए इसकी व्यवस्था करना। असफलता के कई कारण हो सकते हैं- बहानेबाजी, अवसरों को पहचानने में अयोग्यता, अनुशासन की कमी, कमजोर स्वाभिमान, ज्ञान का अभाव, भाग्यवादी दृष्टिकोण, उद्देश्य की कमी, साहस का अभाव। असफलता के गर्भ से ही सफलता का जन्म होता है। जब भी असफलता की दर दुगुनी या इससे अधिक होने लगती है तो समझना चाहिए कि सफलता मिलने वाली है। सफल व्यक्ित छोटे-छोट कार्यो को ही कुशलता और धैर्यपूर्वक करते हैं। वे किसी महान कार्य के लिए इंतजार में नहीं बैठे रहते। जीवन में असफलताएं ही सच्ची सहचरी होती हैं। ये विनम्रता, धैर्य और संयम की शिक्षा देती हैं। जब साहस और विश्वास के साथ कठिनाइयों से जूझते हैं तो सहायता मिलती है। दृढ़ इच्छाशक्ित से सफलता प्राप्त करन की प्रेरणा मिलती है। सफलता का आवश्यक गुण ही प्रतिबद्धता है। सफलता पान के लिए जिम्मेदारी भी होनी चाहिए, क्योंकि सफलता इतनी सहज और सरल नहीं है कि यूं ही अनायास संयोग से मिल जाए। इसके बाद सच्ची सफलता है कि जितना पाए उससे अधिक प्रदान करें। जीवन जीन के लिए है, हार या जीत के लिए नहीं।ं

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