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हर साल हजारों बच्चों हो रहे हैं हाइपोथर्मिया के शिकार

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की ओर से आयोजित नवजात शिशु देखभाल सप्ताह के अंतर्गत कलेक्ट्रेट सभागार में एक सेमीर का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि देश में हजारों बच्चों पैदा होने के साथ ही हाइपोथर्मिया के शिकार होकर मर जाते हैं। वर्ष 2008 के एसआरएस की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में शिशु मृत्यु दर 67 प्रति हजार है। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 53 प्रति हजार है। इस मृत्यू दर को कम करने के लिए देखभाल व प्रयासो में सघनता लानी होगी।

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की ओर से 14 से 21 नवंबर तक नवजात शिशु देख-भाल सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी कार्यक्रम के तहत जिला मुख्यालय में जिलाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक सेमीनार का का आयोजन किया गया। जिसमे विभिन्न चिकित्सालयों में कार्यरत बाल रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया। सीएमओ डा. एके धवन ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर शिशु की मौत जन्म लेते ही हो जाती है। यह बच्चों हाइपोथर्मिया के शिकार हो जाते हैं। दरअसल जब तक बच्चा मां के पेट में रहता है तब उसका तापमान कुछ ओर रहता है लेकिन पैदा होने के साथ ही वह बाहर के तापमान में आ जाता है।

जिसके कारण बच्चा बाहर के तापमान को एक दम नहीं ङोल पाता। इस दौरान बच्चों को ठंड लगती है और वह थोड़ी ही देर में मर जाता है। अधिकतर बडे चिकित्सालयों में डिलीवरी रूम का ताममान बच्चों के अनुरूप रखा जाता है या फिर बच्चाा पैदा होने के साथ उसे गर्म कपड़े में लपेट लिया जाता है। सेमीनार में गर्भवती महिलाओं को टीके लगवाने व शिशुओं को टिटनेस, क्षय रोग, डिपथेरिया, कालीखासी, पोलियो व खसरा आदि बीमारियों से बचाने के जानकारी के साथ सुझाव दिए गए।

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