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विदेशों की तर्ज पर कंपनियां बदलेंगी एचआर पॉलिसी

विदेशों की तर्ज पर देश की कंपनियां आने वाले समय में एचआर पॉलिसी में बड़ा फेरबदल करेंगी। कॉरपोरेट सेक्टर के लिए एचआर की पॉलिसी में परिवर्तन के संकेत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट लखनऊ के नोएडा कैंपस में दिए गए।

कैंपस में शनिवार को हुई एचआर सम्मिट-2009 में एनआईआईटी, मदर डेरी व टाटा जैसी कंपनियों के पदाधिकारियों ने अपने विचार छात्रों के साथ शेयर करेंगे। इस दौरान एचआर पॉलिसी में होने वाले परिवर्तन व आने वाले समय में रोजगार की संभावनाओं को बताया गया। सम्मिट का उद्घाटन संस्थान के निदेशक डॉ. देवी सिंह ने किया।

शनिवार को कैंपस में आयोजित सम्मिट में बताया गया कि पश्चिमी देशों की तरह हमारे देश में एचआर पॉलिसी तेजी के साथ बदलेगी। डालमिया सीमेंट के सीनियर वीपी (एचआर) शांतनु डार ने बताया कि एचआर की नई पॉलिसी का असर नियुक्तियों के साथ-साथ कर्मचारियों के काम करने के तरीकों पर भी पड़ेगा। यह पॉलिसी कर्मचारियों के हित में होंगी, जिसमें काम को लेकर उसकी सीमा तय की जाएगी।

रोल इन एचआर इन कॉरपोरेट गवर्नेस विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा  कि आने वाले शोषण को लेकर नियमों में संशोधन यूरोपियन देशों की तर्ज पर होगा। मदर डेरी फ्रूट एंड वेजीटेबुल लिमिटेड के ग्रुप एचआर शौगत मित्र ने इस दौरान कंपनियों में एचआर की भूमिका के बारे में जानकारी दी।

इस दौरान छात्रों ने अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए विशेषज्ञों से प्रश्न भी पूछे। जिनका उन्होंने प्रोफेशनल व इंडीवीजुअल दोनों तरह से जवाब दिया। दो सेक्शन में होने वाली एचआर सम्मिट में कॉरपोरेट गवर्नेस व एचआर आउटसोर्सिग विषय पर विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किया।

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