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घर पर नहीं पहुंचते बिल, भरना पड़ता है जुर्माना

शहर में बड़ी संख्या में बसी कॉलोनियों में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए बिजली का बिल समस्या बना हुआ है। समय से बिल न मिल पाने की वजह से पैसा जमा नहीं हो पाता। जिससे अगले माह तीन सौ रुपए का दंड झेलना पड़ता है। निजी कंपनी की कार्यप्रणाली से शहर के उपभोक्ताओं को परेशानी ङोलनी पड़ रही है। पावर कारपोरेशन ने बिजली का बिल बनाने और कलेक्शन का जिम्मा निजी कंपनियों को दिया हुआ है।

जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं को अलग और औद्योगिक क्षेत्र में दूसरी कंपनी के कर्मचारी बिल बना कर पैसा बटोरते हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में तो बिजली का बिल न मिल पाने की समस्या नहीं आती। लेकिन हाईराइज इमारतों में रहने वाले नौकरीपेशा लोगों के लिए यह आफत बन गया है। पति-पत्नी सुबह ही काम पर निकल जाते हैं। पीछे से जब कंपनी का कर्मचारी आता है,तो बिल बन कर घर के बाहर ही छोड़ कर चला जाता है। जिससे उनको बिल नहीं मिल पाता और उसका इंतजार करते मियाद पूरी हो जाती है।

जब उपभोक्ता बिजलीघर में जाता है,तो उसे बिल के पैसे के साथ तीन सौ रुपए का दंड अलग से ङोलना पड़ता है। सेक्टर-62 निवासी रमेश बहल का कहना है कि उनको कभी भी बिल नहीं मिल पाता क्योंकि वह और उनकी पत्नी दोनों ही सुबह से आफिस चले जाते हैं। कंपनी का कर्मचारी कब आता है,कब जाता है यह पता नहीं चलता। बिल जमा करने की मियाद खत्म होने के बाद कारपोरेशन की डिफाल्टर लिस्ट में नाम चला जाता है। जिस पर तीन सौ रुपए का जुर्माना दे कर ही नाम कटता है।

सेक्टर-50 निवासी निधि अवस्थी ने बताया कि पहले कर्मचारी आता था। बिल बना कर चेक ले जाता था, पर अब वह काफी समय से नहीं आया। एसई (डिस्ट्रीब्यूशन) ए.पी.मिश्र ने बताया कि ऐसी शिकायतें मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। यदि किसी कॉलोनी में बिल नहीं पहुंच रहा तो उस पर ध्यान दिया जाएगा।

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