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झारखण्ड में नक्सली हिंसा और भ्रष्टाचार प्रमुख चुनावी मुद्दे

आमतौर पर शांत रहने वाला झारखण्ड का पूर्वी सिंहभूम जिला इस समय चुनावी गतिविधियों में डूबा हुआ है। प्रचार में नक्सलवादी हिंसा और भ्रष्टाचार प्रमुख मुद्दे हैं।

यह जिला हो, उरांव और महतो जनजातियों का मजबूत गढ़ है। इसके साथ ही पूरे देश से आए प्रवासियों की अच्छी खासी संख्या भी यहां रहती है। मुख्यधारा के सभी दल भ्रष्टाचार के मुद्दे को भुनाने में लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के निर्दलीय होने के कारण सभी दलों को मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाने में आसानी हो रही है।

आम जनता नक्सली हिंसा और रोज-रोज के बंद से मुक्ति चाहती है। अपने खिलाफ कार्रवाई की एक योजना के विरोध में शुक्रवार को भी नक्सलियों ने 24 घंटे के बंद का आह्वान किया था।

पूर्वी सिंहभूम में बच्चों के लिए अंग्रेजी माध्यम के एक स्कूल की प्रधानाध्यापक स्वीटी सिंह ने कहा, ''केवल चुनाव के समय ही शहर में रात में चहल-पहल रहती है अन्यथा शाम सात बजे के बाद लोग घरों में बंद हो जाते हैं। हम चाहते हैं नक्सली हिंसा और आम जीवन को प्रभावित करने वाले बंद समाप्त हों।''

उनकी बात का समर्थन करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता नागेश वी ने कहा, ''हिंसा भ्रष्टाचार से अधिक बड़ा खतरा है। नक्सलवादी इस्पात शहर पर कभी भी हमला कर सकते हैं।'' पूर्वी सिंहभूम जिले में छह विधानसभा क्षेत्र हैं। इसके जिला मुख्यालय जमशेदपुर में टाटा औद्योगिक समूह की कुछ प्रमुख कंपनियों जैसे टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी, टाटा मोटर्स, टाटा सीमेंट स्थित हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्य में 25 नवंबर से 18 दिसम्बर के बीच पांच चरणों में चुनाव होने हैं।

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