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दो टूक (शनिवार, 21 नवंबर 2009)

अपनी-अपनी फितरत है और अपनी-अपनी खबर। चंद रोज पहले एक तरफ यही बाल ठाकरे थे और एक तरफ यही सचिन। आज भी यही दो नाम सुर्खियों में हैं। हमेशा की तरह एक का नाम देश का सीना चौड़ा करने वाले काम के लिए और दूसरे का नाम शर्म से सिर झुकाने वाले काम के लिए। दोनों मराठा हैं। मगर एक समाज के सर्वोच्च मूल्यों के लिए चर्चित होता है और एक निकृष्ट मूल्यों के लिए। शिवसेना सचमुच एक पहेली है। लोकतंत्र को, संविधान को, व्यवस्था को, देश के भाईचारे को - सबको अंगूठा दिखाने वाली पहेली। वक्त आ गया है कि सूझ-बूझ वाले लोग इस घटिया पहेली का समाधान खोज दिखाएं। एक गलत सोच को उसका कद और मुकाम बता दें।

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  • Web Title:दो टूक (शनिवार, 21 नवंबर 2009)