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कृषि वैज्ञानिकों ने दी गेहूं बीजाई की जानकारी

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत कृषि वैज्ञानिक खेतों में जाकर किसानों को गेहूं की वैज्ञानिक ढंग से बीजाई की जानकारी दे रहे हैं। कृषि विज्ञानियों का कहना है कि परंपरागत खेती के तरीके को बदलना जरूरी है ताकि भविष्य में बेहतर फसलें ली जा सकें।

वीरवार को गांव रिठाल में जवाहर लाल नेहरू नहर के किनारे फौगाट फार्म पर किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने एक पाठशाला का आयोजन किया। इसमें केंद्रीय कृषि विभाग में खाद्य मिशन से जुड़े  तकनीकि अधिकारी और जिला मुख्यालय से कई कृषि अधिकारी और गांव से करीब दो दर्जन किसानों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर किसानों ने अपनी शिकायतें भी रखीं। पाठशाला में आये कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि यह गेहूं की बीजाई का सबसे उचित समय है। इस दौरान किसानों को जागरूक करने के लिए खेत पाठशाला आयोजित की जाएंगी।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि गेहूं की 343, 2329 और 2009 किस्में पुरानी हो गई हैं। इन्हें रोग आसानी से पकड़ लेता है। पैदावार भी कम होती है। विभिन्न रोगों से बचने व पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को चाहिए कि वे किस्म 711, 17, 502 व 509 की बीजाई करें। पहली दो किस्मों में रोग लगने की कोई आशंका नही होतीं है जिस कारण पैदावार बेहतर होती है।

रिठाल किसान क्लब के अध्यक्ष कुलबीर फौगाट व अन्य किसानों ने बताया कि बीज व उपकरण समय पर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। सरकारी दुकानों पर बीज लेने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। स्थानीय किसानों ने बताया कि धान की कटाई के लिए अत्याधुनिक मशीनें तैयार करने की भी जरूरत बताई।

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