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अब क्या करेंगे कल्याण सिंह?

सपा के साथ क्या मिले, अब तो खुद का भी कल्याण स्वयं कल्याण सिंह के हाथों नहीं दिख रहा। कभी भाजपा के हनुमान कहलाने वाले कल्याण सिंह ने भाजपा छोड़ी और राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाई, कुछ समय पश्चात भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं के मिन्नत करने पर पुन: भाजपा में शामिल हो गए, किंतु दोबारा हनुमान अपनी शक्ति को प्रदर्शित न कर पाए और फिर से भाजपा का दामन छोड़ अपने प्रतिद्वंद्वी कहे जाने वाले सपा अध्यक्ष मुलायम से जा मिले। जयाप्रदा के बयान कल्याण की जरूरत नहीं पर प्रतिक्रिया के रूप में पिता के अपमान का हवाला देकर राजबीर सिंह ने सपा का महासचिव पद छोड़ दिया। किंतु कल्याण राम के सहारे हिंदुत्व का डमरू बजाकर फिर भाजपा की ओर अग्रसित होते दिखाई पड़ रहे हैं।

शक्तिवीर सिंह ‘स्वतंत्र’, जामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली

सरकारी बैंक कम नहीं
‘प्रति कर्मी मुनाफे में विदेशी और निजी बैंक अव्वल’ में प्रदर्शित आपके आंकड़े व निष्कर्ष उत्पादकता के लिहाज से भ्रामक हैं। विदेशी व निजी बैंकों को प्राथमिकता क्षेत्र को ऋण नहीं देना होता तथा उनकी शाखाएं ग्रामीण व अर्ध शहरी अंचलों में नहीं होती सरकारी बैंकों को राजभाषा नियमों के अंतर्गत कार्य करना होता है। निजी क्षेत्र के बैंकों को वर्ग बैंकिंग से व्यवहार करना होता है, जबकि सरकारी बैंक जनता के बैंक मास बैंकिंग होते हैं। सभी बैंकों को सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार कार्य करना चाहिए। लाइसेंस देते समय रिजर्व बैंक/ सरकार को शर्त लागू करनी चाहिए।

भीमबली वर्मा, श्रेष्ठ विहार, दिल्ली

भ्रष्टाचारी चिड़ियों के पर कतरें

आज कबीर बहुत याद आते हैं। उनके अनुसार- ‘चिड़ी चोंच भर ले उड़ी नदी न घटय़ो नीर।’ परंतु कबीरदास जी, आज कल की चिड़ियां की चोंच बहुत लम्बी हो गई है। 900 करोड़ क्या 5000 करोड़ भी अपनी चोंच में समा लेती हैं और देखिए वो चिड़िया अपनी चोंच विदेशों में जाकर उड़ेल आती हैं। फिर नदी क्या, सागर को भी खाली होने में कितना समय लगता है। इन चिड़ियों ने भारत रूपी महासागर को भी खाली कर दिया है। बस अब तो आवश्यकता है, दशरथ रूपी आखेटकों की, जो अपने शब्दभेदी वाणों से इन चिड़ियों का शिकार करें और इस भारत को बचाएं।

सत प्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली

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