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बैनामे की रजिस्ट्रेशन फीस बदली

राज्य सरकार ने बैनामे पर लगने वाली रजिस्ट्रेशन फीस संशोधित कर दी है। अब ढाई लाख रुपए से कम के बैनामे पर एक प्रतिशत और ढाई लाख से ऊपर के बैनामे पर दो प्रतिशत (अधिकतम दस हजार रुपए) रजिस्ट्रेशन फीस लगेगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि यदि कोई व्यापारी किन्ही कारणों से फार्म सी और फार्म ई-1 और ई-2 जमा नहीं कर पाता है और यह पाया जाता है कि फार्म जमा न करने के पर्याप्त कारण हैं तो उसके लिए फार्म जमा करने की समय सीमा बढ़ा दी जाएगी। अभी तक यह समय सीमा तीन माह थी।

प्रदेश के प्रमुख सचिव कर एवं निबन्धन देश दीपक वर्मा ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि सभी तरह के बैनामे पर अभी तक स्टैम्प ड्यूटी के अलावा दो प्रतिशत रजिस्ट्रेशन फीस लगती थी। यह फिक्स थी और अधिकतम पाँच हजार रुपए इसकी सीमा थी। अब रजिस्ट्रेशन फीस संशोधित कर देने से राज्य सरकार को 75 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होगी।

वैट पर सुधार के लिए राज्य सरकार ने श्री वर्मा की अध्यक्षता में कर बोर्ड का गठन भी किया है। उन्होंने कहा कि अभी तक एक करोड़ या अधिक का विक्रय करने वाले व्यापारियों को दो बार ऑडिट कराना पड़ता है। एक बार आयकर विभाग के लिए।  दूसरी बार वाणिज्य विभाग के लिए।  अब यह निर्णय लिया गया है कि आयकर में ऑडिट जमा करते समय वाणिज्य का एक पेज लगा दिया जाएगा। उसे ही विभाग स्वीकार कर लेगा।

यह निर्णय भी लिया गया है कि व्यापारियों को अब केवल तीन त्रैमासिक रिटर्न दाखिल करने होंगे। चौथा रिटर्न वार्षिक और त्रैमासिक दोनों मिलाकर भरा जाएगा। श्री वर्मा ने कहा कि कर बोर्ड की उपसमिति 40 से अधिक वाणिज्यिक फार्मो का सरलीकरण करने के काम में लगी है। इसके अलावा ई स्टैम्पिंग की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। जिसमें स्टाम्प का पैसा लेकर बैंकों में जमा कर दिया जाएगा। लोगों को स्टाम्प खरीदने आदि से फुर्सत मिल जाएगी।

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