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नहीं रास आ रही शहरवासियों को यूपी रोडवेज की बसें

शहर से मेट्रो दौड़ने के बाद यूपी रोडवेज की बसें शहरवासियों को रास नहीं आ रही हैं। कम किराए में जल्दी पहुंचाने व  आराम की यह सवारी उन्हें अच्छी लग रही है। जिससे नोएडा से दिल्ली के विभिन्न रूटों पर चलने वाली 52 बसों में चलने वाले यात्रियों की संख्या पचास फीसदी से अधिक घट गई है। ऑफिस के समय को छोड़कर दिन भर यह बसें महज दस से लेकर बीस सवारियों के साथ सड़कोंे पर दौड़ती हैं।

13 नवंबर से आम जनता के लिए मेट्रो के दरवाजे खुलने के साथ ही यूपी रोडवेज की बसों में सवारियों की संख्या कम होने लगी। हफ्ते भर बाद रोडवेज की बसों में यह घटकर पचास फीसदी से भी अधिक पहुंच गई। यात्रियों की संख्या घटने से यूपी रोडवेज को प्रतिदिन एक लाख रुपए का नुकसान हो रहा है। आरएम पीआर बेलवारियर ने बताया कि नोएडा के सिटी रूट पर चलने वाली 74 व ग्रेटर नोएडा के सिटी रूट पर चलने वाली 12 बसों में यात्रियों की संख्या बरकरार है।

प्रगति मैदान, राजीव चौक व नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के रूट पर चलने वाली बसों में यात्रियों की संख्या 50 फीसदी कम हो गई है। जिससे प्रतिदिन एक लाख रुपए का घाटा यूपी रोडवेज को हो रहा है। मेट्रो के दरवाजे खुलते ही सीट करवा ली पक्की : सेक्टर-15 स्थित मेट्रो स्टेशन पर टिकट खरीदते सुमित ने बताया कि जब से आम आदमी के लिए मेट्रो के दरवाजे खुले हैं, तब से मैं ऑफिस जाने के लिए इसी में यात्रा कर रहा है। जिस सफर को तय करने में घंटे भर व उससे ऊपर लग जाया करता था वह 20 से 25 मिनट में तय हो रहा है। उन्होंने बताया कि मेट्रो ट्रेन यूपी रोडवेज, डीटीसी व प्राइवेट हर बस से बेहतर है।

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