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बिहारः जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर मानवाधिकार आयोग भी सख्त

मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) तथा दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल शुक्रवार को 11वें दिन भी जारी रही।

इधर, राज्य मानवाधिकार आयोग ने सरकार को हड़ताली जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज करने और हड़ताल अवधि में इलाज के अभाव में मरे मरीजों के परिजनों को मुआवजा देने का आदेश दिया है। 

सरकार ने दोनों मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में लोगों को चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त चिकित्सकों की तैनाती की गई है, परंतु मरीजों का आरोप है कि इन अस्पतालों में भर्ती मरीजों को उचित सुविधा नहीं मिल पा रही है। हड़ताल के दरम्यान अब तक मरने वाले मरीजों की संख्या एक सौ का आंकड़ा पार कर चुकी है। 

राज्य मानवाधिकार आयोग ने हड़ताली चिकित्सकों के प्रति सख्त रवैया अपनाते हुए उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने और हड़ताल की अवधि में इलाज के अभाव में मरे मरीजों के परिजनों को मुआवजा देने का सरकार को निर्देश दिया है। गुरुवार की शाम हुई आयोग की बैठक के बाद हड़ताली जूनियर डॉक्टरों का निबंधन रद्द करने का निर्देश भी सरकार को दिया गया।

इधर, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ़ प्रभात कुमार ने शुक्रवार को बताया कि हड़ताली जूनियर डॉक्टर सरकार की किसी गीदड़ भभकी से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अपना किया गया वादा निभाए। उन्होंने कहा कि उन्हें भी बार-बार हड़ताल करने की इच्छा नहीं होती।

पीएमसीएच प्रशासन ने हड़ताल के दौरान मरीजों को उचित चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने का दावा किया है। पीएमसीएच के उपाधीक्षक आऱ क़े सिंह ने बताया कि पीएमसीएच में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत आए 125 चिकित्सकों को विभिन्न वाडरे में तैनात कर दिया गया है। 

उल्लेखनीय है कि पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर नौ नवंबर से तथा डीएमसीएच के डॉक्टर 12 नवंबर से अपने 13,000 रुपये के मानदेय को 25,000 से 30,000 तक करने की मांग को लेकर बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं।

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