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...जब एनएसजी ने नहीं किया गैस का इस्तेमाल

...जब एनएसजी ने नहीं किया गैस का इस्तेमाल

पिछले साल मुंबई आतंकी हमलों के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के सशस्त्र आतंकवादियों को रोकने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) पर गैस का इस्तेमाल करने का काफी दबाव था लेकिन किसी अन्य हादसे के डर से और रूसी थियेटर हादसे की पुनरावृत्ति के डर से ऐसा नहीं किया गया।

पिछले साल मुंबई हमलों के दौरान एनएसजी के प्रमुख रहे और ताज तथा ट्राइडेंट होटलों एवं यहूदी भवन में अभियान का नेतृत्व करने वाले जेके दत्त को गैस के इस्तेमाल को लेकर डर था, क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि आतंकवादियों द्वारा फैलाए गए तांडव से ज्यादा नुकसान हो।
   
दत्त को दरअसल डर था कि गैस के इस्तेमाल के बाद मॉस्को के थियेटर हादसे की पुनरावृत्ति नहीं हो जाए, जिसमें करीब 40-50 सशस्त्र चेचन्या उग्रवादियों ने 850 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया था और रूसी बलों ने खचाखच भरे थियेटर में एक अज्ञात रसायन का इस्तेमाल किया था।
   
इसमें बलों ने करीब 40 हमलावरों को ढेर कर दिया था लेकिन करीब 130 बंधक भी इस टॉक्सिक गैस का शिकार हो गए थे। दत्त ने बातचीत में 26 नवंबर की उस भयावह रात को याद करते हुए कहा कि ऐसा करने से मैं आतंकवादियों से ज्यादा लोगों को हताहत कर सकता था। अगर आप इंटरनेट सर्फिंग करते हैं और रूस में हुए इस हादसे पर नजर डालते हैं तो देखेंगे कि इसके घातक प्रभाव थे।

आतंकवादियों से संघर्ष के हालात का जिक्र करते हुए पूर्व एनएसजी प्रमुख ने कहा कि अभियान के जारी रहने के दौरान उन्हें न केवल आम लोगों के एसएमएस मिले बल्कि उनके सहयोगियों ने भी उन्हें सलाह दीं। उनसे कहा गया था कि आप वातानुकूलन प्रणाली से किसी तरह की गैस का इस्तेमाल क्यों नहीं करते।

इसी साल फरवरी में सेवानिवृत्त हो चुके 60 वर्षीय दत्त ने कहा कि गैस का इस्तेमाल करना उस समय ठीक होता, जब किसी छोटे इलाके में या गैरकानूनी तरीके से जमा हुए 100-200 लोगों को तितर-बितर करना हो।
   
दत्त यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि उनके लोग पेशेवर तरीके से अभियान को अंजाम दें। एनएसजी के प्रमुख से पहले पश्चिम बंगाल पुलिस तथा सीबीआई में सेवाएं दे चुके दत्त ने कहा कि सवाल यह था कि वह ऐसा कुछ क्यों करें जिससे बड़ी संख्या में लोग हताहत हों।
   
उन्होंने कहा कि हमने बंधक बनाए जाने के मामलों को देखा है जो एक साल से अधिक समय तक चले हैं। एक दूतावास में यह एक साल तक चला। उन्हें बचा लिया गया। हमने कई अभियान संभाले हैं, जो सात दिन और 15 दिन से अधिक समय तक चले। और जैसा कि मैंने कहा कि एनएसजी के सामने आए हालात और परिदृश्य को देखिए।

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