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दो टूक (20 नवम्बर, 2009)

एक सवाल सरकार से और एक किसान भाइयों से। सरकार कृपया यह बताए कि अगर ऐसे झुक जाना था तो गन्ना मूल्य पर वह अध्यादेश पिछले माह जारी ही क्यों किया था जिस पर इतना बवाल मचा? क्या जरूरी था कि आधी दिल्ली की जान सांसत में डालने के बाद ही किसानों की बात मानने की अक्ल आती?

कोई भी नीतिनिर्णय लेने से पहले हमारे मंत्री और अफसरशाह कुछ होमवर्क भी करते हैं या नहीं? और किसान भाई कृपया यह बताएं कि उन्होंने दिल्ली के आम बाशिंदों को किस बात की सजा दी? जो लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे, उनका गन्ने की कीमत से क्या लेना देना था? उन्होंने किसकी भैंस खोली थी? किसके खेत की मूली उखाड़ी थी? एक शहर के यातायात को बंधक बना लेना क्या वाजिब है?

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  • Web Title:दो टूक (20 नवम्बर, 2009)