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पुलिस से उठा लोगों का भरोसा : हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार के  मामले में एक मंत्री के नाम का सहारा लेने वाले आरोपी को गिरफ्तार नहीं करने पर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायाधीश कैलाश गंभीर ने आरोपी को पिछले एक साल से गिरफ्तार नहीं करने पर कहा कि इस हालत में आम आदमी का पुलिस पर से विश्वास उठना आश्चर्यजनक नहीं है।

आरोपी आरिफ की वारदात से आधा घंटा पहले तक एक मंत्री के साथ होने की दलील को मानकर पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर रही थी। बाद में कोर्ट के आदेश पर उसकी गिरफ्तारी हो सकी। गुरुवार को पेश की गई रिपोर्ट पर सख्त नाराजगी जताते हुए जस्टिस गंभीर ने कहा कि संबद्ध अधिकारियों ने इस मामले में आरोपी को राजनीतिक दबाव या किसी अन्य वजह से गिरफ्तार नहीं किया। इतना ही नहीं पुलिस पीड़ित महिला की ननद के  बयान और मेडिकल रिपोर्ट क ो भी नजरंदाज कर महज आरोपी के बयान पर भरोसा कर गिरफ्तारी से बचती रही।

मंत्री ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि आरिफ कांग्रेस का कार्यकर्ता है और दिल्ली पुलिस के एक एएसआई के साथ 16 अप्रैल को उनसे मुलाकात के लिए आवास पर पौने आठ बजे आया था और वारदात से आधा घंटा पहले रात साढ़े आठ बजे तक वहीं था। अदालत ने कहा कि पुलिस ने मंत्री के बयान को  महत्व देते हुए यह सोचना भी मुनासिब नहीं समझा कि आधा घंटे के भीतर मंत्री के घर से सीलमपुर में घटनास्थल तक आसानी से पहुंचा   जा सकता है।

जस्टिस गंभीर ने कहा ‘इतने गंभीर आपराधिक मामलों में पुलिस के  इस रवैए से पुलिस तंत्र के प्रति आम आदमी के  विश्वास को धक्का लगना निश्चित रूप से लाजिमी है। उन्होंने इस मामले में पुलिस आयुक्त को संबद्ध पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर जांच करने और पांच अप्रैल 2010 तक इससे अदालत को अवगत कराने को कहा

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