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पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में होगा पावर ट्रांसमिशन

जिस तरह से नेशनल हाईवे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत संवारा जा रहा है, उसी तर्ज पर देश में पहली बार एचवीपीएन भी पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट शुरू करेगा। अंतर सिर्फ इतना होगा कि जहां सड़क पर टोल प्लाजा के जरिए प्राइवेट कंपनी अपना हिस्सा वसूलती है, वहीं बिजली निगम में हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (एचईआरसी) की सिफारिश पर एचवीपीएन द्वारा कंपनी का शेयर तय किया जाएगा।

बिलों की अदायगी व अन्य तरह के सभी कार्य पहले की भांति सरकार के हाथ में रहेंगे। डीबीएफओटी (डिजाइन बिल्ड फाइनेंस ऑपरेट एंड ट्रांसफर) के तहत 400 केवी के दो सब-स्टेशन बनेंगे।  झज्जर में बने रहे चाइना लाइट पावर प्लांट (1320 मेगावाट) से इन्हीं दोनों सब-स्टेशनों के जरिए पावर ट्रांसमिशन होगा।

एचवीपीएन के अनुसार, पावर प्लांट लगाने व ट्रांसमीशन कार्य में भारी खर्च होता है। इसी के चलते सरकार ने पहली बार पीपीपी के तहत पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट लगाने का निर्णय लिया है। सब-स्टेशन लगाने के लिए सरकार द्वारा केवल जमीन दी जाएगी, बाकी सब कुछ कंपनी का रहेगी। शुरुआत में 25 वर्ष का कांट्रैक्ट, बाद में उसे एक्सटेंड करने का प्रावधान भी रखा गया है।

नई तकनीकों से लैस 400 केवी के दोनों सब-स्टेशनों पर 382 करोड़ रुपए खर्च होंगे। रोहतक के कबूलपुर व सोनीपत के दीपालपुर गांव में प्रस्तावित दोनों सब-स्टेशनों के निर्माणकार्य को योजना आयोग ने मंजूरी दे दी है। सौ किलोमीटर लंबी एसोसिएटेड ट्रांसमिशन लाइन (एटीएल) से जुड़ने वाले इन सब-स्टेशनों पर 2 गुणा 315 एमवीए की क्षमता वाले ट्रांसफार्मर स्थापित होंगे। निर्माणकार्य पूरा करने के लिए 21 माह का लक्ष्य रखा गया है।

झज्जर से कबूलपुर व कबूलपुर से दीपालपुर वाली लाइन में अब्दुल्लापुर से बवाना तक लूप इन लूप आउट लाइन भी जुड़ेगी। सरकार ने इस योजना को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए चीफ सेकेट्र्री की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया है। फिलहाल दस कंपनियों को पीपीपी प्रोजेक्ट के लिए छांटा गया है। अगले महीने प्रोजेक्ट आबंटित कर दिया जाएगा।

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