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वन विभाग की नजर में आठ वर्षीय बालक शिकारी

वन विभाग की नजर में एक आठ वर्षीय बालक बाघ व चीते का शिकारी है। जिस उम्र में बच्चों बाघ व चीते का नाम सुनकर डर जाते हैं, उसी उम्र के बालक को वन विभाग ने इन जानवरों का शिकार करने का आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया है। हरियाणा के हिसार जिला अंतर्गत कुम्बा गांव के 8 वर्षीय महावीर पर बाघ व चीतों का शिकार करने का आरोप लगा है।

मंगुराहा के वन परिसर पदाधिकारी रामानंद प्रसाद द्वारा दर्ज कराये गये मामले में उक्त बालक को वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की कुल 14 संज्ञेय व गैर जमानती धाराओं के उल्लंघन का दोषी ठहराया गया है। महावीर विगत 21 सितंबर 09 से बेतिया के बाल बंदी गृह में बंद है। उसके विरुद्ध स्थानीय किशोर न्याय परिषद में विचारण वाद सं. 412/09 सरकार बनाम महावीर का ट्रायल शुरू हो गया है।

महावीर को वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की धाराओं 2 (12बी), 2 (16), 2 (31), 2 (32), 2 (35), 9, 27, 29, 31, 39 (1), 39 (3), 48 (ए) एवं 49, 50 के उल्लंघन में आरोपित किया गया है। मुकदमे में उसका पता ग्राम वासुदेवपुर, थाना पिंजौर, तहसील कालका जिला पंचकुला (हरियाणा) अंकित है।

महावीर की बेवा मां रौशनी बताती हैं कि महावीर केवल सात साल का है। वह बाघ की तस्वीर देखकर डर जाता है। लेकिन उसके ऊपर बाघ व चीतों का शिकारी होने का आरोप लगाकर जेल में डाल दिया गया है। उल्लेखनीय है कि महावीर को उसकी नानी सुंदर बाई के साथ 20 सितम्बर 09 को मंगुराहा वन क्षेत्र से बाघ व चीतों के शिकार की तैयारी करते गिरफ्तार करने का दावा वन विभाग के अधिकारियों ने किया है।

उक्त गिरफ्तारी के बाद दर्ज मुकदमे में भी महावीर पर आरोप सिर्फ यही है कि वह शिकार की आरोपी महिला सुंदर बाई के साथ पकड़ा गया था। सुंदर बाई महावीर की नानी है। महावीर की मां रौशनी की माने तो दोनों को बेतिया रेलवे स्टेशन पर एक साजिश के तहत तब पकड़ा गया जब उसकी मां (सुन्दर बाई) बेतिया जेल में बंद अपने पति दरिया सिंह से मिलने आ रही थी।

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