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राइस मिलर्स की पूरी लेवी लेगा खाद्य विभाग

यूपी में धान की सरकारी खरीद जिस सुस्त रफ्तार से चल रही है उससे तो यही लग रहा है कि अपनी सालाना जरूरत का चावल जुटाने के लिए खाद्य विभाग को किसानों से सीधे होने वाली धान की सरकारी खरीद का कम और राइस मिलर्स की लेवी का आसरा अधिक है। डेढ़ माह में खरीद का जो सरकारी आँकड़ा है वह पिछले साल से करीब दो लाख मीट्रिक टन पीछे हैं। खुद विभागीय अफसर और राइस मिलर्स मान रहे हैं कि इस बार लेवी सीएमआर (सरकारी खरीद के धान की कुटाई से मिलने वाला चावल) से अधिक होगी।

खाद्य विभाग के आँकड़ों के मुताबिक अब तक एक लाख 12 हजार 861 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है। जबकि पिछले साल इसी अवधि में करीब पौने चार लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका था। प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की योजनाओं के लिए 29 लाख 57 हजार मीट्रिक टन चावल की जरूरत होती है। राज्य सरकार ने इस बार 16 लाख मीट्रिक टन का ही लक्ष्य रखा है लेकिन कोशिश पूरी जरूरत को जुटाने की है।

ऐसे में, सरकारी खरीद की अपेक्षा लेवी के लिए माहौल अनुकूल लग रहा है। संभवत: इसीलिए लेवी चावल का लक्ष्य चार लाख 72 हजार मीट्रिक टन रखे जाने के बावजूद विभागीय अफसरों ने नाराज राइस मिलर्स को भरोसा दिया है कि उनकी सारी लेवी ली जाएगी। राइस मिलर्स एसोसिएशन के महामंत्री संजीव अग्रवाल ने सरकार के इस रूख का स्वागत किया है।

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