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कार्ड के घोटाले

क्रेडिट कार्ड के फर्जीवाड़े के मामले अखबारों की सुर्खियों में होते हैं। गौर करने वाली बात है कि फ्रॉड की मुख्य वजह पर्सनल जानकारियों का लीक होना होती है। सामान्यत: कार्डधारक का नाम और नंबर कार्ड पर उभरा होता है। पीछे की मैग्नेटिक स्ट्रिप में डाटा होता है, जो मशीन के रीडेबल फॉर्मेट में होता है। क्रेडिट कार्ड में कई महत्वपूर्ण जानकारियां जैसे 16 डिजिट का कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट, तीन डिजिट की कार्ड वैरीफिकेशन वैल्यू (सीवीवी) पीछे प्रिंट होते हैं।

ऑनलाइन फ्रॉड्स में ऑफलाइन, फिशिंग, स्कीमिंग और एप्लीकेशन फ्रॉड प्रमुख हैं। ऑफलाइन फ्रॉड की मुख्य वजह कार्ड चोरी होना या कार्ड की जरूरी जानकारियां लीक होना। वहीं क्रेडिट कार्ड में जालसाजी के सबसे ज्यादा मामले ऑनलाइन देखने में आते हैं। पहले साइबर अपराधी आपका ई-मेल एड्रेस तलाशते हैं, उसके बाद वह बैंक की एक फर्जी साइट बनाकर आपके ई-मेल द्वारा विभिन्न जरूरी जानकारियां आपसे ले लेते हैं। 

इसके अलावा स्कीमिंग सबसे खतरनाक वारदात होती है, इसमें आपके कार्ड का क्लोन बना लिया जाता है और उसके माध्यम से आपको चपत लगाई जाती है। साथ ही कई बार आपके जरूरी कागजात चुरा कर आपके नाम से दूसरा खाता खोल लिया जाता है। 

- जब आप खाता खुलवाने जाएं, तो ध्यान रखें कि जरूरी जानकारियों की फोटोकॉपी दें। साथ ही फोटोकॉपी पर अपने दस्तखत भी कर दें।

- यह जिक्र करना न भूलें कि आप किस काम के लिए जरूरी जानकारियां प्रदान कर रहे हैं।

- अपने बैंक के क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट को लगातार चेक करते रहें।

- अगर आपके कॉर्ड चोरी या खो गया है तो देर न करें, बैंक को फौरन इस बारे में बताएं।

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