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बिहार टूरिज्म में जान फूंकेगा वाटर टूरिज्म

विदेशी पर्यटकों में वाटर टूरिज्म की बढ़ती लोकप्रियता सूबे में पर्यटन के विकास में वरदान साबित हो रही है। इससे न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार के मौके मिल रहे हैं बल्कि हैंडीक्राफ्ट व हैंडलूम का व्यवसाय भी चमकने लगा है। पिछले डेढ़ महीने में ही क्रूज टूरिज्म ने सूबे को 175 से अधिक विदेशी पर्यटक दिए हैं। पांडव क्रूज ने अब तक चार फेरे लगा लगाए हैं, जिसमें अमेरिका, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, फ्रांस व न्यूजीलैंड के पर्यटक यहां आए। पटना, राजगीर, नालंदा, पावापुरी, बोधगया, भागलपुर व मुंगेर का विदेशी मेहमानों ने भ्रमण किया।

इस दौरान कहीं ये हाथी पर चढ़कर घूमे तो कहीं रिक्शे पर। बक्सर में तो बैलगाड़ी से सैर की। वहीं जहाज पर दो मालिस वाले व एक ज्योतिष को भी रोजगार मिला। इससे स्थानीय लोगों को अस्थायी रोजगार के मौके मिले। वहीं विदेशी मेहमान हमारे यहां के हैंडलूम व हैंडीक्राफ्ट से भी बहुत अधिक प्रभावित हुए। पर्यटन विभाग की प्रधान सचिव रश्मि वर्मा के मुताबिक इससे विदेशी पर्यटक बिहार की ओर आकर्षित हो रहे हैं। एक-एक विदेशी पर्यटक ने पचास हजार से दो लाख रुपए तक की यहां खरीदारी की।

उन्होंने हैंडलूम व हैंडीक्राफ्ट के काफी सामान बिहार प्रवास के दौरान खरीदे। इससे राज्य की आर्थिक व्यवस्था को बहुत मदद मिल रही है। हाथी वाले, बैलगाड़ी वाले व रिक्शे वाले को रोजगार मिले। उनके मुताबिक पांडव क्रूज का चौथा खेप तीन दिनों बाद ही पटना पहुंच रहा है। इसमें आने वाले विदेशी मेहमानों को बिहार प्रवास के दौरान पर्यटन निगम की ओर से सारी सुविधाएं उपलब्ध करवायी जा रही हैं। साथ ही सोनपुर मेले में इनके लिए कॉटेज बनवाए गए।

गया में भी निरंजना रिसॉर्ट बनाया जा रहा है। राजगीर में भी कॉटेज बनवाया जा रहा है। मालूम हो कि विदेशी पर्यटकों के मामले में बिहार अब गोवा की बराबरी पर आने लगा है। पिछले वित्तीय साल में बिहार में 3.45 लाख विदेश पर्यटक आए। चार साल पहले तक इनकी तादाद महज 63 हजार थी।

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