DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गड़बड़ी वाले 1500 विद्यालय नहीं बने सेण्टर

यूपी बोर्ड की वर्ष 2010 में होने वाली परीक्षा में गतवर्ष के 1500 गड़बड़ी वाले विद्यालयों को इस बार सेण्टर नहीं बनाया गया है। इससे हडकंप मच गया है। गड़बड़ी वाले विद्यालयों को जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) ने सेण्टर बनाने से साफ मना कर दिया हैं, लेकिन बची कमी मण्डल स्तरीय बैठक में पूरी हो गई।

जब कमिश्नर ने सख्ती से ऐसे बवाल वाले विद्यालयों को सेण्टर बनाने से वंचित रखने का डीआईओएस को निर्देश दिया। इलाहाबाद में इस तरह के 55 सेण्टर है। परीक्षा के बाद दो विद्यालयों में उत्तर पुस्तिकाएं मिली थीं।
यूपी बोर्ड की वर्ष 2009 की परीक्षा में कुल 9840 सेण्टर थे। परीक्षा के दौरान करीब 1160 सेण्टरों पर बड़े पैमाने पर नकल हुई और पर्चे आउट हुए थे। 340 परीक्षा केन्द्रों के अचानक रातों-रात बदले जाने से वहां के  परीक्षार्थियों ने जमकर बवाल कर दिया था। इससे यूपी बोर्ड की किरकिरी हुई थी और फिर से परीक्षा करनी पड़ी। इससे अतिरिक्त खर्च भी बोर्ड पर लाखों रुपए आया था।

इस पर परीक्षा के दौरान ही बोर्ड सचिव प्रभा त्रिपाठी ने निर्णय लिया था कि ऐसे किसी भी विद्यालय को सेण्टर नहीं बनाया जाएगा जहां पर परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी हुई थी। उन्होंने उसी समय बवाल वाले विद्यालयों को वर्ष 2010 में सेण्टर बनाने से साफ इन्कार करते हुए सूची शासन को भेज दी थी। इस पर शासन भी सख्त हुआ और ऐसे विद्यालयों को सेण्टर बनाने से साफ मना कर दिया। इस प्रकार के इलाहाबाद जिले में 55, कौशाम्बी में 22, प्रतापगढ़ में 19, लखनऊ में 48, कानपुर में 67, आगरा में 72, गोरखपुर में 70, मुजफ्फर नगर में 44, बरेली में 32, देवरिया में 21, वाराणसी में 32, कन्नौज में 57, बलिया में 85, मथुरा में 55, चित्रकूट में 26, जौनपुर में 17, आजमगढ़ में 31 और अन्य जिलों में 10 से 15 विद्यालय तक है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:गड़बड़ी वाले 1500 विद्यालय नहीं बने सेण्टर