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जर्मनी से मिला दुर्लभ भूकंप मापक-यंत्र

किसी वैज्ञानिक के लिए शोध में सहायक सिद्ध होने वाले यंत्र से बड़ी और कोई चीज नहीं होती। अगर कोई दुर्लभ और महंगा यंत्र बहुत आसानी से मिल जाए वह भी मुफ्त में तो वैज्ञानिक की क्या दशा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है।

अगर आप ऐसे किसी वैज्ञानिक के चेहरे का भाव पढ़ना चाहते हों तो इविवि के भूग्रहीय विज्ञान विभाग के डॉ.जयंत के. पति से मुलाकात कीजिए। इनके शोध कार्यों से प्रभावित हो जर्मनी के दो वैज्ञानिकों ने इन्हें दुर्लभ यंत्र ‘यूनिवर्सल स्टेज’ भेंट किया है। 1980 से यह यंत्र बनना बंद हो गया, तब इस बेहद संवेदनशील यंत्र की कीमत साढ़े छह लाख रुपए थी। डॉ. पति इसे जीवन का एक अनमोल तोहफा मानते हैं क्योंकि, वह इस यंत्र को रखने वाले भारत के गिने-चुने लोगों में शामिल हो गए हैं।

पृथ्वी पर गिरने वाले उल्का पिण्डों के सूक्ष्मतम अध्ययन में मदद करने वाले इस बहुउपयोगी यंत्र को पाने के लिए डॉ. पति 2005 से कोशिश कर रहे थे। यूएस की एक दुकान पर यह उन्हें यंत्र मिलने की जानकारी हुई थी। यंत्र चालू हालत में नहीं था और कीमत भी अधिक थी, इसलिए उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी। इस वर्ष अगस्त में वह एक सेमिनार के सिलसिले में जर्मनी गए थे। उन्होंने वहां इस यंत्र को देखा। पेट्रोग्राफिक माइक्रोस्कोप के साथ उपयोग की जाने वाली इस छोटी-सी मशीन को पाने की उनकी ललक देख जर्मनी के रुहूर विवि के इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजिकल, मेनरोलॉजिकल, जीयोफिजिक्स पेट्रोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. ओलफ मेडनबैक तथा हम्बार्ड विवि के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के वैज्ञानिक प्रो. उवे रेनाल्ड ने प्रयास कर इनके लिए न केवल इस यंत्र की व्यवस्था की बल्कि मुफ्त में भेंट कर दिया। जर्मनी के मिनराजिकल सोसाइटी के माध्यम भेजा गया यह यंत्र दो दिन पहले डॉ. पति को मिला। उन्हें बतौर कस्टम ड्यूटी 23 हजार रुपए देने पड़ेंगे।

डॉ. पति कहते हैं कि इस यंत्र के मिलने से उनकी प्रयोगशाला काफी समृद्ध हो गई है। उल्का पिण्ड प्रभाव पर पहले से चल रहे शोध कार्यों में मदद तो मिलेगी ही, भविष्य में अंतरिक्ष यान से मिलने वाले नमूनों का अध्ययन भी किया जा सकेगा। ऐसे नमूनों का अध्ययन भारत में गिने-चुने स्थानों पर संभव है। चंद्रायन मिशन-वन के डेटा एनालेसिस ग्रुप के सदस्य डॉ. पति का कहना है कि इस यंत्र की मदद से भूगर्भ, पैलेट पत्थर तथा मिनरल का सॉक प्रेशर अध्ययन भी किया जा सकेगा।

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