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बिजली कंपनियों ने सुखाई बालगंगा

भिलंगना लघु जल विद्युत परियोजना प्रथम व गुनसोला लघु जल विद्युत परियोजना से विद्युत उत्पादन शुरू करने के लिए भिलंगना व बालगंगा नदी को टनलों में डाले जाने से दोनों नदियों का अस्तित्व सात किलोमीटर तक खत्म हो गया है। नदी के अस्तित्व को लेकर भिलंगना नदी बचाओं संघर्ष समिति जनहित याचिका दर्ज करने की तैयारी कर दी है।

भिलंगना ब्लाक में भिलंगना नदी पर भिलंगना लघु जल विद्युत परियोजना प्रथम फलेन्डा में बन चुकी है। थयेली से सुरंग में पानी डालने पर घनसाली तक नदी साढ़े पांच किलोमीटर पूर्ण रूप से सूख चुकी है। नदी में पानी न होने के कारण रौंसाल गांव के ग्रामीणों के खेत भी सूखे पड़े हुए हैं। यहीं हाल बालगंगा नदी का है बूढ़ाकेदार से लेकर चानी तक नदी सूखी पड़ी हुई है।

नदियों के सूखने के कारण  इस बीच के जल जन्तु खत्म तो हुए ही हैं साथ ही सूखी नदी में खनन माफियों की पौ बारह हो गयी है। बांध कम्पनियों के द्वारा नदियों को सुखाये जाने की किसी को परवाह नहीं है प्रशासन भी मूक दर्शक बन कर बैठा है।

जबकि पर्यावरण मंत्रलय की शर्तों के अनुरूप नदी के कुल पानी का 25 प्रतिशत पानी छोड़ा जाना अनिवार्य है, लेकिन जल विद्युत परियोजनाएं केवल 0.25 प्रतिशत पानी नदी में छोड़े जाने की बात कह रहे हैं, जो नदी में दिख भी नही रहा है। भिलंगना लघु जल विद्युत परियोजना के प्रभारी साइ बाबा का कहना है कि अनुबन्ध के अनुसार पानी छोड़ा जा रहा है तथा रौंसाल गांव को पम्प के माध्य से पानी दिया जाएगा।

भिलंगना नदी बचाओ अभियान के संयोजक अवतार सिंह नेगी ने बताया कि सूखी नदियों में खनन के कारण नदी गहरी हो रही है और काश्तकारों के खेत सूख रहे हैं। उनका कहना है कि बांध कम्पनियां अपने फायदे के लिए नदियों को पूर्ण रुप से सुखा रहे हैं। जो पर्यावरण की दृष्ट्रि से उचित नहीं है।  उन्होने बताया कि नदी बचाओ संघर्ष समिति ने भिलंगना व बालगंगा नदी के अस्तित्व को लेकर जनहित याचिका दायर करने की तैयारी कर दी है।

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