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'रक्षा क्षेत्र में है एफडीआई बढ़ाने की जरूरत'

'रक्षा क्षेत्र में है एफडीआई बढ़ाने की जरूरत'

रक्षा तैयारियों में देश की सियासत को अडंगा बताते हुए वायु सेना उप प्रमुख एयर मार्शल प्रद्युम्न कुमार बारबोरा ने गुरुवार को कहा कि वर्षों से आतंरिक राजनीति का रक्षा पर बहुत असर पड रहा है।
 
एयर मार्शल बारबोरा ने यहां विमानन क्षेत्र में नई जान फूंकने के विषय पर आयोजित सम्मेलन में कहा कि आंतरिक राजनीति से खासतौर से रक्षा मामलों पर बहुत बुरा असर पड रहा है। ऐसा वर्षों से हो रहा है। कभी कोई सत्ता में होता है तो कभी कोई विपक्ष में लेकिन जब भी सरकार कोई स्वीकृति देती है तो उस समय का विपक्ष ना कह देता है। इससे बहुत बुरा असर होता है।
 
रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 26 प्रतिशत से बढाकर 49 प्रतिशत करने की उद्योग की मांग का समर्थन करते हुए एयर मार्शल बारबोरा ने कहा कि हमने रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश के मामले में साहसी कदम नहीं उठाए। हमें अधिक साहस दिखाना होगा और विदेशी निवेश आकर्षित करना होगा।

वायु सेना उप प्रमुख ने रक्षा क्षेत्र में एफडीआई बढाने का समर्थन ऐसे समय किया है जब सरकार घरेलू रक्षा कम्पनियों को प्रोत्साहन देने के लिए अनेक कदम उठा रही है। रक्षा क्षेत्र में 30 अरब डालर की खरीदारी हो रही है जिसके 2012 तक 35 अरब डालर तक पहुंचने की सम्भावना है।

वहीं अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया के मामलों के विदेश उपमंत्री राबर्ट ब्लेक ने कहा कि मेरा मानना है कि भारत सरकार को एक काम करना चाहिए, वह यह कि भारतीय रक्षा कंपनियों में विदेशी निवेश की सीमा को 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत किया जाए। ब्लेक का यह बयान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ 24 नवंबर को होने वाली शिखर बैठक के कुछ दिन पहले आया है।
    
ब्लेक ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां चाहती हैं कि बीमा, रक्षा, बैंकिंग तथा खुदरा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों से हमें अपना व्यापार और निवेश बढ़ाने का मौका मिलेगा। वर्तमान में विदेशी कंपनियों को भारतीय कंपनियों में सिर्फ 26 प्रतिशत का निवेश करने की अनुमति है। रक्षा क्षेत्र की कई वैश्विक कंपनियों ने भारत के रक्षा क्षेत्र में निवेश की इच्छा जताई है।

रक्षा क्षेत्र की एक प्रमुख कंपनी बीएई सिस्टम्स ने महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स के साथ 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी में संयुक्त उपक्रम शुरू करने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन सरकार की ओर से इसकी मंजूरी नहीं मिली।

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