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डेंगू को लेकर एमसीडी पर उठे सवाल

राजधानी में डेंगू के मामले जिस तरह से लगातार बढ़ रहे हैं, उससे एमसीडी की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। निगम की कार्रवाई कागजों पर ही दिखाई दे रही है। मौके पर न तो फोगिंग हो रही है और न ही जागरूकता अभियान दिखाई दे रहा है। केवल चालान करके और नोटिस भेजकर डराया जा रहा है।

गुरुवार को एमसीडी की स्थायी समिति में यह चिंता पक्ष-विपक्ष के पार्षदों ने एक स्वर से जताई। डेंगू पर अल्पकालिक चर्चा की शुरुआत करते हुए विपक्ष के नेता जय किशन शर्मा व खविंद्र सिंह ने कहा कि एमसीडी के अफसर डेंगू के मामलों में केवल खानापूरी करने में लगे हैं। करोड़ों रुपये की दवाएं खरीदी जा रही हैं लेकिन, सब बेअसर हैं। फोगिंग की कार्यवाही कागजी है।  स्थायी समिति के पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि किसी भी संक्रामक बीमारी की जबावदेही से एमसी़डी नहीं बच सकती। डेंगू के जितने मामले दिखाए जा रहे है, हकीकत में उससे कहीं ज्यादा हैं।

भाजपा की रजनी अब्बी ने कहा कि कामनगेम्स खेल के चलते कई जगहों गढ़ढे हो गए हैं, जो डेंगू मच्छरों को बढ़ावा दे रहे हैं। मीरा अग्रवाल ने कहा कि डेंगू महामारी का रूप लेता जा रहा है तो सुमन कुमार गुप्ता ने कहा कि सीवर व जल बोर्ड की लाइन मिलने से जलजनित बीमारियों को बढ़ावा मिल रहा है। डेंगू के मसले पर भाजपा के सुनील कक्कड़ व राजेश गौड़ ने भी एमसीडी की कार्रवाई पर असंतोष जताया। स्थायी समिति अध्यक्ष रामकिशन सिंघल ने पार्षदों से मिलकर कमियां लिखवाने और उन्हें दूर करने के निर्देश दिए।

निगम स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एन.के. यादव ने कहा कि डेंगू की रोकथाम को एमसीडी भरसक प्रयास कर रही है। पहले यह मामले सितंबर व अक्तूबर में होते थे लेकिन पहली बार बारिस देर से होने के कारण नबवंर में हो रहे हैं।

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