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सत्ता-करीबियों पर नहीं चला पुलिसिया रौब

जिस पार्टी में मंत्री, पुलिस-प्रशासन के अधिकारी व सत्ता के करीबी स्वयं मौजूद हों उसके आयोजकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करती भी तो कैसे? ऊपर से लगातार आरोपियों के पक्ष में सिफारिशी फोन भी पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए थे।

प्रदेश सरकार ने बसपा के एक नेता को एमएलसी का टिकट दिया है, जिसकी खुशी में बुधवार की रात यह पाटी आयोजित की गई थी। पार्टी में जिले के आला अफसरों के साथ ही प्रदेश सरकार के कई मंत्री भी शामिल थे। पार्टी अपने शबाब पर थी कि एसडीएम साहब ने उसमें खलल डाल दिया। परिणामस्वरूप जब उनकी व साथ आए लोगों से मारपीट के बाद पुलिस पंहुची तो वहां मौजूद लोग पुलिस पर रौब गांठने लगे। मुसीबत यह भी थी कि अगर कार्रवाई नहीं की तो भविष्य में कोई भी किसी अधिकारी पर हमला बोल देगा और अगर ठोस कार्रवाई कर दी तो फिर सफेदपोशों की टेढ़ी निगाह।
 
दबाव में पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ 147, 323, 504, 506 व 307 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर चार को गिरफ्तार किया और उनका मेडिकल कराया। दबाव का असर देखिए संगीन धाराओं में गिरफ्तार लोगों को सुबह होते ही थाने से ही जमानत छोड़ दिया। यही नहीं मेडिकल के बाद आरोपियों पर से धारा 307 भी हटा दी। इस बारे में पुलिस के आलाअधिकारी कुछ भी कहने से बचते रहे। हांलाकि इंदिरापुरम थानाध्यक्ष राजेश द्विवेदी ने बड़ी बेबाकी से यह कह दिया कि सभी आरोपी यहीं के हैं और वह कहीं भागने वाले नहीं हैं, ऐसे में उन्हें जमानत दे दी गई।

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