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गन्ने के मूल्य मुद्दे पर सोमवार को सर्वदलीय बैठक

गन्ने के मूल्य मुद्दे पर सोमवार को सर्वदलीय बैठक

केन्द्र सरकार ने गुरुवार को दिल्ली में विशाल रैली के बाद गन्ने के मूल्य के मुद्दे और अन्य मुद्दों पर विचार विमर्श के लिए सोमवार सुबह एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन इसी मुद्दे विपक्ष ने संसद नहीं चलने दी।

इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गन्ना किसानों को उचित कीमत दिए जाने का पुरजोर समर्थन करते हुए केंद्र सरकार से गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 129 रूपए 85 पैसे प्रति क्विंटल निर्धारित किए जाने के अध्यादेश को अविलंब वापस लिए जाने की मांग की।

राष्ट्रीय लोकदल के आह्वान पर गुरुवार को जंतर मंतर पर आयोजित गन्ना किसानों की एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा), जनतादल-यू और वामपंथी दलों और कई अन्य पार्टियों के नेताओं ने कहा कि केन्द्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार किसान विरोधी है। नेताओं ने कहा कि आम चुनाव से कुछ समय पहले किसानों का ऋण माफ करने वाली सरकार ने गन्ना के न्यूनतम मूल्य निर्धारित करने वाला अध्यादेश लाकर अपनी काली नीति उजागर कर दी है जिसका हर स्तर पर पुरजोर विरोध किया जाएगा।

राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि गन्ने की कीमत निर्धारण करने का मसला किसान गन्ना समितियों और मिल मालिकों पर छोड़ दिया जाना चाहिए। इसमें अन्य किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अजित सिंह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने गन्ना कीमत अध्यादेश को जल्दी वापस नहीं लिया तो किसान अपने आंदोलन को और व्यापक बनाते हुए रेल और सड़क यातायात अवरुद्ध करने के साथ-साथ दिल्ली के पानी, दूध और सब्जियों की आपूर्ति को रोक देंगे। आंदोलन की आगे की रुपरेखा जल्दी ही तैयार कर इसकी तारीख घोषित कर दी जाएगी।

रैली के कारण दिल्ली और विशेषकर पूर्वी दिल्ली का इलाका बुरी तरह प्रभावित हुआ। जगह-जगह यातायात जाम के चलते लोगों को भारी कठिनाई हुई।

उधर भारतीय किसान यूनियन की किसानों की मांगों को लेकर 16 नवम्बर से शुरु पंचायत गुरुवार को चौथे दिन भी जारी रही। पंचायत के चलते कनाट प्लेस की तरफ से संसद मार्ग आने वाली सड़क बंद रही और यूनियन के नेताओं ने सड़क पर ही डेरा डाल दिया। राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ ने भी किसानों की मांग को लेकर धरना दिया।

केंद्र सरकार ने गन्ना मूल्य नियंत्रण संशोधन अध्यादेश 2009 के तहत गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 129 रूपए 85 पैसे प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जिसके खिलाफ किसान आंदोलन पर उतर आए हैं।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) एवं उत्तर प्रदेश की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सरकार पूरी तरह से किसान विरोधी है और हम सभी मिलकर उनकी किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष करेंगे।

मुलायम सिंह यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो किसानों के हितों में कई फैसले लिए गए थे। पिछले महीने लाए गन्ना मूल्य नियंत्रण संशोधन अध्यादेश के तहत सरकार ने गन्ने का न्यनूतम समर्थन मूल्य 129.85 प्रति क्विंटल तय किया है जिसे लेकर गन्ना किसान आंदोलनरत है।

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