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गन्ना किसानों का दिल्ली में हंगामा, पीएम की आपात बैठक

गन्ना किसानों का दिल्ली में हंगामा, पीएम की आपात बैठक

केंद्र सरकार द्वारा गन्ने का न्यूनतम मूल्य 129 रूपए 85 पैसे प्रति क्विंटल निर्धारित किए जाने के खिलाफ गुरुवार को हजारों किसानों ने जंतर मंतर सहित विभिन्न स्थानों पर धरना प्रदर्शन किया।

बढ़ते विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंत्रीमंडल की आपात बैठक बुलाई है, जिसमें अध्यादेश में नियत की गई कीमतों पर दोबारा से विचार किए जाने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने भी इसी मसले को लेकर पीएम से मुलाकात भी की थी और कहा था कि वह आगे भी प्रधानमंत्री से मिलते रहेंगे।

राष्ट्रीय लोकदल, भारतीय किसान यूनियन एवं राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के बैनर तले किसानों ने अलग-अलग धरना शुरू किया। केंद्र सरकार ने गन्ना मूल्य नियंत्रण संशोधन अध्यादेश-2009 के तहत गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 129 रूपए 85 पैसे प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जिसके खिलाफ किसान आंदोलन पर उतर आए हैं।

राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह की अगुवायी में जंतर मंतर पर आयोजित धरने को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) एवं उत्तर प्रदेश की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सरकार पूरी तरह से किसान विरोधी है और हम सभी मिलकर उनकी किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष करेंगे।

यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो किसानों के हितों में कई फैसले लिए गए थे। इस बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दलों के नेताओं की बैठक कर गन्ना किसानों के मसले को लोकसभा में शुक्रवार को भी उठाने का फैसला किया गया।

लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में संसद भवन स्थित कार्यालय में हुई बैठक में गन्ना किसानों की समस्या को संसद के दोनो सदनों में कल और ज्यादा मजबूती के साथ उठाने पर सहमति बनी।

राजग की मांग है कि गन्ना नियंत्रण संशोधन आदेश-2009 को वापस लिया जाना चाहिए। गठबंधन ने तय कियाकि यह मांग पूरी होने तक सरकार पर दबाव बनाने हेतु काम रोको प्रस्ताव सहित विभिन्न संसदीय प्रावधानों का इस्तेमाल किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त खाद्यान्नों तथा आवश्यक वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों तथा कमरतोड़ महंगाई के खिलाफ संसद में जोर-शोर से आवाज उठाने का फैसला किया गया। जनहित के अन्य मसलों तथा महत्वपूर्ण मामलों को उठाने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में भारतीय जनता पार्टी की नेता सुषमा स्वराज, जनता दल (यू) के शरद यादव, शिवसेना के मनोहर जोशी, अनंत गीते और अकाली दल शेतकारी कामगार पार्टी आदि के नेता मौजूद थे।

गौरतलब है कि इस मसले पर लोकसभा को गुरुवार को शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन स्थगित कर देना पड़ा था। जरूरी कागजों को पटल पर शोर-शराबे के बीच ही रखकर लोकसभा अध्यक्ष ने लोकसभा पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।

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