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हड़ताली जूनियर डॉक्टरों पर अब कड़ी कार्रवाई

बिहार के पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) तथा दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) के जूनियर डॉक्टर अपने मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर गुरुवार को दसवें दिन भी हड़ताल पर रही जबकि सरकार अब इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का मन बना रही है।

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल लंबी खिंचने के कारण पीएमसीएच तथा डीएमसीएच में चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। यहां के सभी वार्डों में मरीजों की संख्या कम हो गई है। हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत बाहरी चिकित्सकों को यहां कार्य पर लगाया गया है।

इधर, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नंदकिशोर यादव ने गुरुवार को कहा कि सरकार हड़ताली जूनियर डॉक्टरों की हठ के सामने नहीं झुकेगी। उन्होंने कहा कि सरकार पहले भी कह चुकी है कि उनकी मांगों को मान लिया गया है जिन पर कार्यवाही हो रही है।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार एक-दो दिनों में हड़ताली जूनियर डॉक्टरों को नोटिस जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर नोटिस जारी होने के बाद भी वे काम पर नहीं लौटे, तो उनका निबंधन रद्द कर दिया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि झारखण्ड में जूनियर डॉक्टरों को प्रतिमाह 21 हजार रुपए मानदेय मिलता है, जबकि यहां के जूनियर डॉक्टर 25 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिर भी सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है। लेकिन बातचीत का रास्ता बंद कर वे लोग हठ पर अड़े हैं जो अमानवीय रवैया है। 

इधर, पीएमसीएच में हड़ताली जूनियर डॉक्टरों ने बुधवार से ही समानांतर ओपीडी प्रारंभ कर दी है। उनका मानना है कि मरीजों को परेशान करना उनका उद्देश्य नहीं है। इस कारण मरीजों को सुविधा देने एवं उनकी परेशानी को देखते हुए सामानांतर ओपीडी चलाई जा रही है।

उल्लेखनीय है कि पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर अपने 13,000 रुपए के मानदेय को 25,000 से 30,000 तक करने की मांग को लेकर नौ नवंबर से तथा डीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर 12 नवंबर से बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं।

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