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सोनापानी: सादगी का सौंदर्य

सोनापानी: सादगी का सौंदर्य

सोनापानी में हमेशा ही पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन इसके अनुपम सौंदर्य का लुत्फ मार्च एवं मई महीने में उठाया जा सकता है। यहां के लिए यात्रा काठगोदाम पहुंच कर शुरू की जा सकती है। गांव सतोली से सोनापानी की दूरी मात्र आधे घंटे में पैदल या पोनी द्वारा पूरी की जा सकती है। सोनापानी के बीचोंबीच एक पुराना प्राकृतिक झरना दिखाई पडम्ता है। माना जाता है कि इस झरने में औषधीय गुण पाए जाते हैं।
 
सोनापानी की स्थापना का किस्सा भी कम दिलचस्प नहीं है। कहा जाता है कि इस एस्टेट की स्थापना ब्रिटिश राज के समय की है। पास के कैंटोनमेंट के कुछ ब्रिटिश आर्मी ऑफिसर पर्वतश्रेणी पार करते हुए इस खास झरने के पास रुके। उन्होंने इस पानी के स्वाद को इतना पसंद किया कि 19वीं सदी के उत्तरार्ध में इस प्राकृतिक झरने के पानी को पास के ब्रिटिश कैंप अल्मोड़ा में पोनी एवं घोड़े द्वारा पहुंचाया जाने लगा। इनमें से एक ऑफिसर कैप्टन कौशल सिंह बुराएओकी, जो क्वीन अलेक्जेंडर के निजी गोरखा राइफल्स में थे, उन्हें रिटायरमेंट के समय अपनी पसंद की जगह चुनने का मौका दिया गया। यहां के झरने व सौंदर्य से अभिभूत होकर उन्होंने इस जगह को चुना और इसे सोनापानी नाम दिया। हिमालय गांव सोनापानी देवदार और चीड़ के पेड़ के जंगलों से घिरा हुआ है। इनके बीचोंबीच में 12 लाल ईटों वाले छोटे-छोटे सुंदर घरनुमा कॉटेज बने हुए हैं, जो कि पत्थरों से बने हुए रास्तों से जुड़े हैं। यह जगह लगभग 20 एकड़ तक फैली हुई है। इस एस्टेट की एक खासियत यहां खुबानी, सेब, आलूबुखारे और आड़ के पेड़ का पाया जाना भी है। इन कॉटेजेज को निहायत ही सुविधाजनक व आरामदायक बनाया गया है। यहां ब्रिटिश, कुमाऊंनी और आधुनिक वास्तुशिल्प समन्वय देखने को मिलता है। कमरे में कोई फोन, टेलीविजन नहीं रखा गया है। सिर्फ प्रकृति के मनमोहक वाद्ययंत्र की ध्वनियां ही सुनाई पडम्ती हैं। कमरे की खिड़की से बर्फ से घिरी पर्वतश्रेणियों, जैसे त्रिशूल, नंदादेवी, मैकोली, नंदाकोट, पांचजोली आदि को देखा जा सकता है। यहां पर भारतीय, मुगलई एवं चाइनीज व्यंजन पेश किये जाते हैं। यहां हर सप्ताहांत किसी मशहूर भारतीय संगीत कलाकार का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। यहां मनोरंजन के लिए अन्य कई गतिविधियां भी होती हैं, जिनमें रॉक क्लाइंबिंग, रैप्लिंगग, रिवर क्रॉसिंग आदि का संचालन विशेषज्ञों के निर्देशों के तहत कराया जाता है।

कैसे पहुंचें
यह स्थान दिल्ली से लगभग 275 कि.मी. की दूरी पर है। आप दिल्ली से काठगोदाम तक के लिए ट्रेन ले सकते हैं। अपने वाहन से जा रहे हैं तो हापुडम्, मुरादाबाद, रामपुर, बिलासपुर, रुद्रपुर और हल्द्वानी होते हुए काठगोदाम पहुंच सकते हैं। काठगोदाम से लगभग 69 कि.मी. की दूरी पर सोनापानी स्थित है। बीच में भीमताल, भुवाली, रामगढ़, नाथूकान और सतोली गांव पड़ते हैं।

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