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नए प्रोजेक्ट में दी जाएगी धर्मस्थलों को भी जमीन!

कायदे-कानून तोड़कर शहर में अवैध धर्मस्थल क्यों बनाए जा रहे हैं? खासतौर पर पॉश इलाकों में, जहां एक-एक इंच जमीन की कीमत सोने के भाव होती है। हॉट सिटी की सच्चई अब प्रशासन की समझ में आई है, तो नई आवासीय योजनाओं में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च के लिए भी अलग से जमीन देने पर विचार किया जा रहा है। प्रशासन के प्रस्ताव पर जीडीए ने भी इस बात पर हामी भर ली है। हालांकि अभी फाइनल प्लानिंग होना बाकी है।


प्रशासनिक स्तर पर इस वक्त जिले में बने एक-एक धर्मस्थल को चिह्न्ति कर उसकी शासन को रिपोर्ट भेजे जाने का काम चल रहा है। यह पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद शुरू हुई है। जीडीए, नगर निगम समेत कुछ विभागों ने तो सरकारी और सार्वजनिक जगहों पर बने अवैध धर्मस्थलों की सूची प्रशासन को सौंप दी है, जिसमें ऐसे धार्मिक स्थानों की तादाद सैकड़ों में बताई है। अकेली जीडीए की ही सूची में शहरी क्षेत्र में अवैध धर्मस्थलों की संख्या पौने दो सौ बताई गई है।


हालांकि जीडीए वीसी ने साथ में भी लिखित तौर पर बता दिया कि अब ऐसे किसी धार्मिक स्थान को हटाने की कोशिश भी हुई तो शहर में बखेड़ा हो सकता है। इसे लेकर प्रशासन भी टेंशन में है।


मौजूदा हालात में इतनी बड़ी संख्या में अवैध धर्मस्थल हटाने की प्रशासन सोचने तक की स्थिति में नही है। आगे के लिए थोड़ी चिंता जरूर की जा रही है, इसलिए सिटी मजिस्ट्रेट उमेश मिश्र जीडीए के चीफ इंजीनियर अनिल गर्ग के साथ बैठक कर आगे से बनने वाली नई योजनाओं में सभी वर्गो के लिए धर्मस्थलों के लिए अलग से जमीन आबंटित करने का प्रस्ताव दिया है। बकौल सिटी मजिस्ट्रेट, यदि ऐसा होता है तो प्रशासन अवैध धर्मस्थल बनाने के मामले में सख्ती से कार्रवाई कर सकेगा। अच्छी बात ये है कि जीडीए चीफ इंजीनियर ने भी इस मुद्दे पर अपनी सहमति दे दी है। यदि कोई पेंच न फंसा तो अब मामला जीडीए की मीटिंग में औपचारिक स्वीकृति और आगे की प्लानिंग के लिए रखा जाना है।

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