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रानी का पत्र बुंदेली थाती, इसे लंदन में न रहने देंगे

झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई का डलहौजी को लिखा पत्र को झाँसी का है। भारत का है। इसे विलायत से लाने के लिए हरचंद कोशिश की जाएगी। यह बात केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य व अन्य जनप्रतिनिधियों ने कही है। इस बीच झाँसी संग्रहालय के निदेशक डा. पांडेय भी इस सिलसिले में अपने प्रयासों में जुट गए हैं। रानी के पत्र के बारे में अखबारों में छपने के बाद बुधवार को झाँसी में इतिहास के जानकारों ही नहीं आम आदमी के बीच भी चर्चा होती रही।

कालेज के छात्रों में खासतौर पर। सब यही कहते दिखे, बुंदेली विरासत विलायत में नहीं रहने देंगे। क्षेत्रीय विरासत पर खास जानकारी रखने वाले इतिहास के शिक्षक डा. हरिमोहन अग्रवाल ने कहा कि वे पत्र की वापसी के लिए शिक्षक बिरादरी को जोड़ेंगे। केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि वे इस सिलसिले में ब्रिटिश उच्चयोग को पत्र लिखने जा रहे हैं। ऐसे ही  गरौठा विधायक दीपनारायण सिंह यादव ने कहा कि  इस पत्र को मँगाने के लिए वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र भेज रहे हैं।

वे बुन्देलखण्ड के सपा नेताओं के एक प्रतिनिधि मंडल के साथ प्रधानमंत्री से मिलेंगे। उधर महरौनी, विधायक रामकुमार तिवारी ने कहा कि वे प्रदेश और केन्द्र सरकार को पत्र भेज रहे हैं। प्रदेश और केन्द्र सरकार दोनों से ही माँग की जाएगी कि रानी के इस पत्र को लंदन से मँगाया जाए। झाँसी संग्रहालय के निदेशक डा. एके पांडेय ने बताया कि वे संस्कृति सचिव को पत्र लिखने जा रहे हैं। उन्होंने माना कि पत्र की वापसी इतनी सरल नहीं।

इसीलिए वे इस बात का प्रयास कर रहे हैं कि फिलहाल उसकी स्कैन कापी झाँसी संग्रहालय तक आ जाए। इसके लिए वे मेरठ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जेडी शर्मा की मदद ले रहे हैं। प्रोफेसर शर्मा 1857 पर शोध कर रहे हैं। उनके प्रयासों में लंदन स्थित भारतीय उच्चयोग में कार्यरत उनके भाई भी योगदान कर रहे हैं। उन्होंने लंदन से फोन पर बताया है कि पत्र की स्कैन कापी एक पखवारे में उनके पास आ जानी चाहिए।

फिरंगी हुकूमत को लिखे रानी के पत्र की बात सामने आने से पूरा झाँसी झंकृत हो गया है। जानकार कहते हैं, यह सही है कि ईस्ट इंडिया कम्पनी के तत्कालीन गर्वनर लार्ड डलहौजी को भेजे गए इस पत्र को खुद रानी लक्ष्मीबाई ने नहीं लिखा और यही कारण है कि यह पत्र फारसी भाषा में है।

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  • Web Title:रानी का पत्र बुंदेली थाती