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शराब पर महंगाई बेअसर, खपत बढ़ी

बढ़ती महंगाई के चलते घरों के चूल्हों की आंच भले ही मंद हो रही हो मगर, मयखाने गुलजार हैं। पीने वालों के उत्साह ने इस दफा पिछले कई बरसों के खपत सम्बंधी आंकड़ों को पीछे धकेल दिया है।

चालू आबकारी सत्र के अभी सात महीने ही बीते हैं लेकिन, देशी शराब की खपत में चालू आबकारी सत्र करीब सात फीसदी की बढ़ोतरी ने खुद महकमे के अफसरों को भी अचरज में डाल दिया है। प्रदेश में देशी शराब की खपत में सालाना वृद्धि दर 3 से 4 फीसदी की रहती थी। खास बात यह कि सूबे में दूध की बिक्री में इजाफा तो नहीं ही हुआ है, अलबत्ता पहले से कमी आई है। पराग डेयरी के महाप्रबंधक के मुताबिक कीमतें बढ़ने की वजह से बिक्री थोड़ी कम जरूर हुई है।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक देसी शराब की बढ़ती खपत के पीछे नरेगा योजना की मजदूरी भी एक अहम वजह हो सकती है। खासतौर पर पूर्वांचल में देसी शराब की खपत ज्यादा बढ़ रही है। नरेगा ने मजदूरों की आय बढ़ाई है। नरेगा में घपले की शिकायतों के मद्देनजर यह अनुमान भी लगाया जा रहा है कि गांवों में प्रभाव रखने वाले लोगों की भी आय बढ़ी है। यह खुलासा दबी जबान से आबकारी अफसर भी करते हैं। उधर अंग्रेजी शराब और बीयर की खपत की बढ़ोतरी के पीछे छठा वेतनमान लागू होने के बाद सरकारी कर्मचारियों की बढ़ी तनख्वाहें अहम वजह मानी जा रही है।

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