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गूगल से बनेगा यूपी के महानगरों का नया नक्शा

प्रदेश के महानगरों का नया नक्शा बनेगा। उसमें शहरों में जुड़े नए क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा। फिर उसी आधार पर तैयार होगी नई महायोजना। राज्य सरकार ने इस सम्बन्ध में तैयारी करने के निर्देश सभी विकास प्राधिकरणों और नगर नियोजकों को दे दिए हैं। ये महायोजना-2011 बनाने की तैयारी है।

लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ और गाजियाबाद महानगरों की महायोजना-2001 बनी थी। वैसे हर 10 साल में महायोजना बनाई जाती है, लेकिन महायोजना-2001 वर्ष 2005 तक जारी होती रही। इसके बाद भी महानगरों का काफी विस्तार हुआ। इन शहरों का मेट्रो क्षेत्र घोषित किया गया। इसमें आस-पास के कई छोटे शहर और कस्बे जोड़े गए। अब सरकार ने इस बात की जरूरत महसूस की है कि महानगरों में हो रहे विस्तार को देखते हुए लोकप्रिय सर्च इंजन गूगल की इकाई गूगल अर्थ का इस्तेमाल कर नया नक्शा बनवाया जाए और उसी आधार पर नई महायोजना तैयार की जाए। गूगल अर्थ उपग्रह के जरिए दुनिया के किसी भी हिस्से का नक्शा भेजता है।

महायोजना बनाने की जिम्मेदारी नगर नियोजकों के साथ विकास प्राधिकरण को सौंपी गई है। इसके लिए शासन ने विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों को एक पत्र लिखा है। जिसमें उनसे कहा गया है कि महानगरों की बढ़ रही आबादी और उसके क्षेत्र फल को देखते हुए हर महानगर का नया नक्शा बनवाया जाए। नया नक्शा बन जाने के बाद विकास प्राधिकरणों का दायरा और बढ़ जाएगा। शहरों में आए नए क्षेत्रों के आधार पर नगरों के विकास की योजनाएं बनाई जाएंगी।

शासन ने कहा है कि गूगल अर्थ से बनवाए गए नक्शे से स्पष्ट हो जाएगा कि शहर का क्षेत्र किस दिशा में बढ़ रहा है और किस क्षेत्र में किस चीज की ज्यादा आवश्यकता है। नई जरूरत के आधार पर शहरों के नए बाईपास, रिंग रोड पार्क, स्टेडियम, अंतरराष्ट्रीय स्तर के कन्वेंशन सेंटर बनाए जाने के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। शहर के व्यवसायिक क्षेत्र और औद्योगिक क्षेत्र को भी इस नई महायोजना में प्रस्तावित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें यह भी प्रस्ताव रखने के लिए कहा गया है कि नए क्षेत्रों में मेट्रो ट्रेन चलाने की व्यवस्था पहले से प्रस्तावित कर दी जाए ताकि भविष्य में मेट्रो लाइन डालने में दिक्कतें न आएं।

इस नए गूगल अर्थ नक्शे से नगर निगमों को भी अपनी आय बढ़ाने का मौका मिलेगा, उन्हें मकानों की ताजा तस्वीरें मिल जाएंगी, जिससे वे अधिक से अधिक मकानों से हाउस टैक्स, वाटर टैक्स और सीवर टैक्स वसूल सकेंगे।

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