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एकाग्रता के रोल मॉडल सचिन तेंदुलकर

क्रिकेट के इस महानायक पर समाचार पत्रों, पत्रिकाओं तथा इंटरनेट पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है। समीक्षा और मनोविज्ञान के सभी पहलुओं को पीछे छोड़कर सदी के सबसे महान क्रिकेट सितारे के बारे में लिखते हुए मुझे बेहद खुशी महसूस हो रही है। सचिन असाधारण प्रतिभा के धनी हैं। जहां तक मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण की बात है तो सही मायने में वो एक रोल मॉडल हैं। मैंने सचिन के करियर को उस दिन से निकटता से देखा है जब उन्होंने क्रिकेट का आगाज किया था। हालांकि किसी ऐसे व्यक्ति की समीक्षा करना मुश्किल है जिससे आपकी कभी मुलाकात न हुई हो। फिर भी आज के युवाओं की सोच को जेहन में रखते हुए मेरी लिखने की इच्छा है ताकि वे इस खिलाड़ी की मानसिक दृढ़ता और गुणों से कुछ सीख सकें।

मानसिक दृढ़ता है बेमिसाल
सचिन की मानसिक दृढ़ता गजब की है। खुद पर यकीं, अपने लक्ष्य के बारे में जानकारी और दूसरों को प्रोत्साहित करने का हुनर, यही ऐसी बातें है जो सचिन को दूसरों से अलग करती हैं। हरेक युवा को उनसे सीखने की जरूरत है। कई लोगों के लिए यह एक अचरज की बात है कि किसी क्षेत्र में एक व्यक्ति इतने लंबे समय तक टिका कैसे रह सकता है और वो भी पूरे जोश और दमखम के साथ। सचिन की मानसिक दृढ़ता ने ही उन्हें लगातार मजबूत किया। इतनी चोटों के बावजूद भी सचिन ने कभी हिम्मत नहीं हारी और हमेशा एक शानदार वापसी की।

सकारात्मक रवैया
सचिन का रवैया हमेशा सकारात्मक रहा है। यह सीधे तौर से दिखाता है कि सफलता का कोई शॉर्ट कट नहीं होता। और हां, यह सच केवल खेल पर ही लागू नहीं होता। किसी भी क्षेत्र में लगातार विकास तथा सफलता हासिल करने के लिए व्यक्ति को अपने दृष्टिकोण में सकारात्मकता लानी होगी। सचिन ने खेल में अपनी प्रतिबद्घता एवं गंभीरता दर्शाई है। साथ ही यह इस बात की बानगी भी है खुद को करियर के एक अलग मुकाम पर पहुंचाने के बाद भी उन्होंने अपनी प्रेरणा का स्तर बनाए रखा है। हमारे युवावर्ग को इससे सीखने की जरूरत है। जीवन में विकास और सफलता के लिए जो आवश्यक हो उसे हमें सकारात्मक ढंग से लेते हुए आत्मसात करना होगा। 

दबावों का सामना
यदि हम सचिन के करियर पर स्कूल के दिनों से नजर डालें तो हम देखेंगे कि यह सराहनीय है कि शायद ही वह किसी विवाद में फंसे हों। खेल के मैदान पर या मैदान के बाहर एक बार भी ऐसा नहीं हुआ जब उनके व्यवहार को लेकर उंगली उठाई गई हो या उसने कभी अशिष्टता दिखाई हो या कभी अशिष्ट भाषा का इस्तेमाल किया हो। ऐसे समय में जब सब शिष्टाचार और अच्छी आदतें भूल चुके हों, उनका व्यवहार न सिर्फ त्रुटिहीन बल्कि अनुसरणीय रहा है।

उनका पूरा करियर ही सम्मान की भावना और ऐसे उद्देश्यों को फैलाने वाला रहा है जो सफलता का एक मुख्य अंग रहा है। यही सब उन्हें सही अर्थों में एक उपयुक्त रोल मॉडल बनाती हैं। उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पहलू ये है कि वह एक प्रतिभावान और असाधारण खिलाड़ी तो हैं ही, साथ ही अपने प्रशंसकों की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। सचिन के करियर में तमाम उतार-चढ़ाव आए, लेकिन किसी भी परिस्थिति में सचिन डिगे नहीं, हमेशा मुसीबतों का उन्हें डटकर मुकाबला किया। यह हम सबके लिए महत्वपूर्ण है कि हम उसकी दबावों को झेलने की क्षमता, कठिन काम को बीच में ही न छोड़ अंजाम तक पहुंचाने की आदत से सीख लें।

हार न मानने का जज्बा
हरेक को सचिन की सफलता से सीख लेने की जरूरत है। सचिन का समूचा खेल जीवन सफलता के मॉडल की तरह है। आखिर किस तरह अपने जीवन में वैल्यू और सिद्धांतों के साथ सफलता पाई जा सकती है, सचिन उसकी जीती-जागती मिसाल हैं। इसलिए अपने देश और पूरे विश्व में जो भविष्य के ‘युवा तेंदुलकर’ हैं, उन्हें सोच और प्रतिबद्घता का वही स्तर विकसित करने की ज़रूरत है जो सचिन ने समय-समय पर प्रदर्शित किया है।
जीवन तथा पेशे में रोजमर्रा आने वाली दिक्कतों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किस तरह खुद को शिखर पर पहुंचाया जा सकता है, इसके बारे में सचिन से सीखा जा सकता है। मुश्किलों को धता बताकर उन पर विजय पाने का कौशल सचिन को बखूबी मालूम है। शायद यही बात है जो एक खिलाड़ी के रूप में सचिन को अलहदा बनाती है।

एक मनोवैज्ञानिक होने के नाते, मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि हर समाज में कुछ आदर्श व्यक्ति बदलाव ला सकते हैं। युवाओं को दिशा दिखाने के लिए उनकी मदद ली जानी चाहिए। मैं मानता हूं कि हमारे लिए अपने युवाओं को कुछ नया करने या परिवर्तन के लिए सचिन को रोल मॉडल के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।  
प्रस्तुति: मीनाक्षी

कई अंदरूनी गुणों का मिश्रण
मैं सचिन तेंदुलकर की तरह सफल आदमी बनना चाहता हूं। वो एक प्रेरणा की तरह हैं, जो मेरे चेतन और अवचेतन में हमेशा घूमते रहते हैं। न सिर्फ वह हमें खुद के गुणों को निखारने में मददगार होते हैं बल्कि वह अपने आदर्श व्यक्ति चुनने में भी मदद करते हैं। मौजूदा दौर में जब हम बच्चों और युवाओं के लिए किसी रोल मॉडल की बात करते हैं तो उस खांचे में सचिन पूरी तरह फिट बैठते हैं।

वर्तमान में रोल मॉडल को पैसे, सुंदरता और प्रसिद्धि से जोड़कर देखा जाता है, पर एक बेहतरीन रोल मॉडल वह है जिसके विचारों, क्रियाकलापों में वैल्यू हों। अकसर हम अपने वास्तविक रोल मॉडल को तब तक नहीं पहचान पाते जब तक हम अपनी पर्सनल ग्रोथ महसूस नहीं करते या यूं कहें कि हम अपनी तरक्की पर जब तक ध्यान नहीं देते। ऐसे में अपने प्रेरणास्त्रोत बनाने से पहले कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

विश्वास : जिसे अपनी क्षमताओं पर भरोसा है।
वास्तविकता : कई बार लोगों की पर्सनालिटी अपने रोल मॉडल की तरह नहीं होती, लेकिन लोग वैसी पर्सनालिटी का दिखावा करते हैं।
व्यक्तिगत : जो लोग ऐसा सोचते हैं कि पर्सनालिटी यूनिक होनी चाहिए। और हां, वो लोग खुद की तुलना उससे न करते हों और न ही इस बात की तमन्ना करते हों कि मैं उसके जैसा अमीर और खूबसूरत बन जाऊं।
क्षमता : वो व्यक्ति ऐसी जिंदगी जीता हो जैसी कि आप जीना चाहते हैं।
भावनाओं की समझ : जो व्यक्ति दयालु हो और लोगों से बातचीत करना चाहता हो। सचिन तेंदुलकर विश्वास, शालीनता, समानुभूति, स्किल, सकारात्मक रवैया और कई अंदरूनी गुण का पूरा मिश्रण हैं। सचिन अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं।
डॉ. जितेंद्र नागपाल

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