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पशुओं को बीमारी से बचाने के उपाय सुझाए

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने पशुपालकों से मवेशियों को सर्दी के प्रकोप तथा इस मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाए रखने की अपील की है। विशेषज्ञों के मुताबिक सर्दी का असर मनुष्य की भांति पशुओं को भी झेलना पड़ता है। इस मौसम में उनके स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही पशु के लिए घातक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों ने पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए उपाय भी सुझाए हैं।

विश्वविद्यालय के अधीन पशुविज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसएम चहल के अनुसार पशुपालक अकसर ठंड के इस मौसम में पशुओं के रखरखाव पर ध्यान नहीं देते, जबकि इस मौसम का पशुओं की उत्पादकता तथा स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। इस स्थिति से बचने के लिए विशेषज्ञों ने उन्हें पशुओं को सर्दी के प्रकोप से बचाए रखने की सलाह दी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक ठंड, ओस व सर्द हवा से पशुओं के बचाव के लिए उन्हें रात्रि में पशुशाला के भीतर रखने तथा पशु के बांधने की जगह को सूखा रखने को कहा है। रात के समय पशुशाला के फर्श पर तूड़ी, भूसा आदि का बिछाबन पशु को गर्माहट देने में मददगार साबित होता है। इसके अतिरिक्त गीले के कारण पशुओं में पड़ने वाले जूं व चीचड़ जैसे परजीवियों से भी बचाव होगा।

डॉ. चहल ने इस मौसम में भैंस की रिंडरपेस्ट तथा मुंह-खुर बीमारियों से बचाने के लिए इसके बचाव का टीका लगवाने की भी सलाह दी है। उन्होंने बताया कि ये टीके एकसाथ नहीं लगवाने चाहिए, इनमें कम से कम 15 दिन का अंतर अवश्य होना चाहिए। रिंडरपेस्ट बीमारी हो जाने पर पशु का इलाज कठिन होता है और वह मर भी सकता है। यह बचाव टीका पशु चिकित्सालयों में मुफ्त लगाया जाता है।

उनके अनुसार यह भैंसों के नए दूध होने का भी समय है। भैंसों में ब्याने के डेढ़ माह बाद गर्मी के लक्षण दिखने पर नए दूध करवाएं। भैंस को नियमित रूप से गर्मी में लाने के लिए उन्हें संतुलित आहार तथा खनिज मिश्रण नियमित तौर से दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार इस मौसम में पशुओं को नहलाने के लिए ताजे पानी या गुनगुने पानी का प्रयोग करना चाहिए। यदि ज्यादा गर्मी हो तो पशुओं व बच्चों को शाम के वक्त खरहरा कर दें ताकि उनके शरीर की सफाई हो जाए।

पशुओं के शरीर पर धूल न जमने दें वरना उनको चमड़ी के रोग हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि सर्दी के मौसम में पशुओं को अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है इसलिए पशुओं को दाने की ज्यादा मात्र दी जानी चाहिए। उनके  चारे में थोड़ी मात्र में तेल भी मिलाया जा सकता है। इसके अलावा मुर्गीघरों में भी तापमान का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। 

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