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प्रदेश में हॉयर एजूकेशन की एक लाख सीटे खाली

 देश में जहां इंजीनियर व डाक्टरों की कमी है और इनकी सीटों के लिए मारामारी मची हुई है, वहीं प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में 20 हजार सीटें खाली पड़ी हुई हैं। इंजीनियरिंग के अलावा एमसीए व एमबीए सहित अन्य डिग्री कोर्स में प्रवेश देने वाले सैकड़ों कॉलेज 40 फीसदी खाली पड़ी सीटों के साथ फाइनल परीक्षाओं की तैयारी करवा रहे हैं। इन खाली पड़ी सीटें पर कॉलेज दाखिला देना चाहते है, लेकिन यूपीटीयू की मनमर्जी व नियमों के कारण यह सीटें अब तक नहीं भर पाई हैं। वहीं, समाज कल्याण का पैसा देर में आने का दंश भी कॉलेजों को ङोलना पड़ रहा है। जिसके चलते यूपी टेक्निकल इंस्टीट्यूशन्स फाउंडेशन अगले वर्ष से अपनी कोटे की सीटों को कम करवाने के लिए पत्र लिख रहा है। यही नहीं अगर यूपीटीयू का रवैया इसी तरह का रहा तो फाउंडेशन एआईसीटी से आग्रह कर सीधे परीक्षा व दखिला प्रक्रिया करवाने को कहेगा जिससे यूपीटीयू का वजूद खत्म हो जाएगा। फेडरेशन के इस तेवर से शासन भी अनजान नहीं है नतीजतन उसने मामले में 20 नवम्बर को प्रमुख सचिव (तकनीकी शिक्षा) वृंदा स्वरूप के नेतृत्व में बैठक कर हल निकालने के लिए कहा है। जिसमें विवि कुलपति प्रो. कृपाशंकर, कुलसचिव यूएस तोमर भी शामिल होंगे।


वर्ष 2009-10 के सेमस्टर प्रक्रिया में काउंसलिंग की देरी के चलते कॉलेजों में विभिन्न कोर्सो की करीब 1 लाख सीटें खाली पड़ी हुई हैं। इनमें सबसे ज्यादा सीटें इंजीनियरिंग की है। इसका सबसे बड़ा कारण है यूपीटीयू की काउंसलिंग का देरी से होना है। क्योंकि जुलाई माह के अंत तक खत्म होने वाली काउंसलिंग अगस्त माह तक चलती रही। जिसके कारण प्रदेश के छात्र अन्य राज्यों में चले गए। काउंसलिंग प्रक्रिया लेट होने से दखिले लेट हुए और पढ़ाई भी देरी से हुई नतीजतन बच्चाों को तैयारी का कम समय मिला। इसके अलावा समाज कल्याण कोटे से दी जाने वाली संस्थानों को राशि भी छह माह में मात्र 40 प्रतिशत कॉलेजों को ही मिली है,जबकि नियमानुसार इसका भुगतान 45 दिनों में होना चाहिए था। इसी तरह प्रतिसीट व समेस्टर के द्वारा यूपीटीयू जो फीस वसूलता है उसमें से एक अंश वापिस कॉलेजों को देना होता है,यह राशि प्रदेश के कॉलेजों को मिलाकर करोड़ों रुपए की है लेकिन इस वर्ष इसका पैसा यूपीटीयू ने नहीं दिया है,जिसके कारण प्रदेश कॉलेज फेडरेशन ने अगले वर्ष यूपीटीयू से हाथ खींचने की बात कही है। फेडरेशन के महासचिव डा.अतुल जैन ने कहा कि यूपीटीयू की गलतियों का खमियाजा हर वर्ष कॉलेज भुगतते है। अगर समय पर काऊसिलिंग प्रक्रिया हो तो हमारी सीटे हर वर्ष खाली नहीं जाए। इस वर्ष काउंसलिंग प्रदेश की अन्य राज्यों के बाद हुई जिसके कारण हमारी अधिकांश सीटे खाली रही।

क्यों है विवाद
काऊसिंलिंग का लगातार देरी से होना
समाज कल्याण विभाग द्वारा छात्रवृति समय पर न देना
यूपीटीयू द्वारा सेमेस्टर की वापसी राशि का भुगतान न होना

यूपीटीयू अपने बनाए नियमों पर नहीं चलता जिसका खामियाजा छात्र व कॉलेज भुगतते हैं,अगर समय पर सब कुछ हो तो हर वर्ष सीटें खाली नहीं रहे। इसलिए एआईसीटी से इस संबंध में हस्तक्षेप करने को कहा गया है कि वे कॉलेजों को मुक्त करें जिससे यूपीटीयू के समकक्ष प्रवेश परीक्षा करा छात्रों का दाखिला लिया जा सके।
डा.अतुल जैन
यूपी टेक्निकल इंस्टीट्यूशन्स फाउंडेशन महासचिव

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