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महिला को मिली कोर्ट से राहत

भारतीय मेजर के प्यार में पड़ निकाह करने वाली अफगानी नागरिक शाबरा बेगम को एक बार फिर दिल्ली अदालत से बड़ी राहत मिली है। कड़कड़डूमा स्थित एडिशनल सेशन जज वी के खन्ना की अदालत ने भारतीय सेना में मेजर चन्द्रशेखर पंत की गुजाराभत्ता आदेश को चुनौती देने संबंधी याचिका को नामंजूर करते हुए साफतौर पर कहा कि ‘अफगानी महिला ने मेजर के साथ निकाह के जो सबूत पेश किए हैं उन पर विश्वास न करने की कोई वजह नहीं है। लिहाजा सत्र अदालत निचली अदालत के आदेश को न्यायसंगत मानती है तथा मेजर को निर्देश देती है कि पूर्व के आदेशानुसार अपनी अफगानी पत्नी को प्रतिमाह 8 हजार रुपये बतौर गुजाराभत्ता अदा करे।’


अदालत के इस निर्णय से एक तरफ जहां शाबरा ने सुकून की सांस ली है। वहीं, मेजर चन्द्रशेखर पंत के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। पेश मामले के अनुसार अफगानी महिला शाबरा ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि मेडिकल कोर में तैनात मेजर चन्द्रशेखर पंत वर्ष 2006 में काबुल स्थित भारतीय सेना के अस्पताल में कार्यरत था। उस समय वह भी वहां अनुवादक के पद पर काम कर रही थी। इसी बीच दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी और उन दोनों ने निकाह करने का फैसला किया। 10 नवंबर 06 को उन्होंने निकाह कर लिया। कुछ समय दोनों काबुल में किराये के मकान में रहे। उसके बाद मूल रूप से पिथौरागढ़ के रहने वाले मेजर पंत वापस आने का वादा कर भारत लौट आए। जब काफी समय वह लौटे, तो याचिकाकर्ता उन्हें ढूंढती हुई पिथौरागढ़ पहुंची लेकिन मेजर ने शाबरा के साथ कोई संबंध होने से साफ इंकार कर दिया।

तब शाबरा ने कड़कड़डूमा अदालत में गुजाराभत्ता याचिका दाखिल की। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने शाबरा की याचिका को स्वीकृत करते हुए मेजर पंत को 8 हजार रुपये गुजाराभत्ता अदा करने के निर्देश दिए। सत्र अदालत ने पूर्व के आदेश को बरकरार रखा है।

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  • Web Title:अफगानी महिला को मिली कोर्ट से राहत