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मिरगी

मिरगी यानी एपिलेप्सी एक न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर है जिसमें रोगी को बार-बार दौरे पड़ते है। दिमाग में किसी गड़बड़ी की वजह से बार-बार दौरे पड़ने की समस्या हो जाती है। दौरे के दौरान व्यक्ति का दिमागी संतुलन पूरी तरह से गड़बड़ा जाता है और उसका शरीर लड़खड़ाने लगता है।

इसका प्रभाव शरीर के किसी एक हिस्से पर देखने को मिल सकता है, मसलन चेहरे, हाथ या पैर पर। ज्यादातर लोगों में भ्रम होता है कि ये बीमारी आनुवांशिक होती है पर सिर्फ एक प्रतिशत लोगों में ही ये बीमारी आनुवांशिक होती है। दौरों की अवधि कुछ सेकेंड से लेकर दो-तीन मिनट तक होती है। और हां, अगर यह दौरे लंबी अवधि तक के हों तो डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

मिरगी का इलाज दवाओं और सजर्री के द्वारा किया जा सकता है, पर इस रोग का उपचार लगातार कराने की जरूरत होती है। कभी-कभी इस रोग का उपचार तीन से पांच वर्ष तक चलता है। कई मामलों में मिरगी की स्थिति पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अलग होती है। दोनों की स्थिति में अंतर का प्रमुख कारण महिलाओं और पुरुषों में बायोलॉजिकल और सामाजिक फर्क का होना होता है।

सामान्यत: महिलाओं में इसका प्रभाव प्रजनन शक्ति में देखने में आता है। हालांकि, इसका मतलब ये भी नहीं निकालना चाहिए कि मिरगी से पीड़ित महिला रोगियों को बच्चा नहीं होता, ऐसा बिल्कुल नहीं है। मिरगी से पीड़ित महिला रोगियों के बच्चे सामान्य होते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि जन्म के दौरान चोट लगने की वजह से भी मिरगी का रोग होता है। मनोचिकित्सक कहते हैं कि इस रोग से ग्रसित व्यक्ति आम आदमी की तरह अपना जीवन बिता सकते हैं।

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