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दूसरी पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार

दूसरी पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि किसी व्यक्ति की मत्यु के बाद यदि उसकी पहली पत्नी को कोई आपत्ति नहीं है तो उसकी दूसरी पत्नी को भी सरकारी नौकरी में अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार है।

हिंदू विवाह अधिनियम के तहत एक व्यक्ति एक शादी को निभाते हुए केवल एक ही पत्नी रख सकता है और दूसरी शादी आईपीसी की धारा 494 और हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 17 के तहत अपराध होगी, जिसमें सात साल तक के कड़े कारावास की सजा दी जा सकती है।
   
न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू और न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा की पीठ ने कर्नाटक सरकार की एक अपील को खारिज करते हुए कहा, जब दोनों पत्नी राजी हो गयी हैं तो आप आपत्ति करने वाले कौन होते हैं। यदि एक पत्नी अनुकंपना नियुक्ति चाहती है और दूसरी मुआवजे संबंधी लाभ चाहती है तो आपको क्या परेशानी है।
   
पीठ ने राज्य सरकार द्वारा कर्नाटक हाई कोर्ट के एक निर्देश को चुनौती देते हुए दाखिल की गयी याचिका पर आदेश जारी किया। कर्नाटक हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि आर्म्ड रिजर्व फोर्स में हैड कांस्टेबल जी़ हनुमंत गोड़ा की दूसरी पत्नी लक्ष्मी की नियुक्ति पर विचार किया जाए। दूसरी पत्नी लक्ष्मी की तरफ से वकील एम कमरुद्दीन अदालत में आये।
   
शीर्ष न्यायालय ने राज्य सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत एक शादी के दौरान किसी शख्स की दो पत्नियां नहीं हो सकतीं इसलिए तथाकथित दूसरी पत्नी केवल पहली पत्नी के साथ सुलह करके नियुक्ति के अधिकार पर दावा नहीं कर सकती।

पूरा मामला यह है कि हनुमंत गोड़ा ने पहले अनुसूया से शादी की थी लेकिन इसी शादीशुदा जिंदगी के दौरान उन्होंने एक अन्य महिला लक्ष्मी से विवाह रच लिया। हनुमंत की मत्यु 12 अक्तूबर 1988 को हो गयी थी, जिसके नतीजतन उनकी संपत्ति और पेंशन के साथ साथ अनुकंपा नौकरी हासिल करने के सवाल पर भी कानूनी लड़ाई शुरू हो गयी। हनुमंत की सरकारी नौकरी में कार्यरत होने के दौरान ही मृत्यु हो गयी थी।
  
एक निचली अदालत ने अनुसूया के पक्ष में फैसला सुनाया लेकिन दूसरी पत्नी ने कर्नाटक हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी। हालांकि बाद में दोनों महिलाओं ने सुलह कर ली, जिसके तहत वे संपत्ति और पेंशन आदि को बराबर साझा करने के लिए तैयार हो गयीं। इस बात पर भी सहमति हो गयी कि अनुसूया को पति की मौत के बाद कुछ मुआवजे संबंधी लाभ मिलेंगे, वहीं दूसरी पत्नी लक्ष्मी पुलिस विभाग में नौकरी का दावा करेगी।
   
कर्नाटक हाई कोर्ट ने 25 सितंबर 2001 को अपने फैसले में इस सहमति फार्मूला पर अपनी मुहर लगा दी थी और राज्य सरकार को तीन माह के भीतर लक्ष्मी को अनुकंपा नियुक्ति देने पर विचार करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने इस पर सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगायी, जिसे खारिज कर दिया गया।

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