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भारत-पाक संबंधों में तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं

भारत-पाक संबंधों में तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं

अमेरिका-चीन बयान में भारत-पाक रिश्तों के उल्लेख से खिन्न भारत ने बुधवार को स्पष्ट किया कि द्विपक्षीय संबंधों में वह किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार नहीं करेगा। दूसरी ओर अमेरिका ने बयान का असर कम करते हुए इसे सकारात्मक रूप देने की कोशिश की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके चीनी समकक्ष हू जिनताओ द्वारा जारी संयुक्त विज्ञप्ति में भारत़-पाक रिश्तों का उल्लेख किये जाने पर की गयी तल्ख टिप्पणी में कहा कि किसी तीसरे देश की भूमिका पर न विचार किया है और न ही यह जरूरी है।

उधर ओबामा़-हू बयान को लेकर किसी प्रकार की चिंता को कम करने का प्रयास करते हुए भारत में अमेरिकी राजदूत टिमोथी जे रोमर ने कहा कि  मैं सोचता हूं कि वह काफी सकारात्मक बयान था। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन ने केवल इतना कहा कि वे दक्षिण एशिया में अधिक शांति एवं स्थिरता के लिये काम करेंगे।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार पाकिस्तान के साथ सभी लंबित मुद्दों को शिमला समझौते के अनुरूप शांतिपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत के जरिये सुलझाएगी।

भारत की यह प्रतिक्रिया ओबामा और हू के मंगलवार के बयान बाद सामने आयी। अमेरिकी और चीनी नेताओं ने संयुक्त बयान में दक्षिण एशिया की स्थिति को क्षेत्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों में शुमार करते हुए भारत़-पाक संबंधों में सुधार का समर्थन किया था और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के प्रति तत्परता दिखायी थी।

प्रवक्ता ने कहा कि किसी तीसरे पक्ष की भूमिका पर न विचार किया गया है और न इसकी जरूरत है। हम विश्वास करते हैं कि पाकिस्तान के साथ सार्थक बातचीत केवल आतंक अथवा आतंक के खतरे से मुक्त माहौल में ही हो सकती है।

दोनों नेताओं के बीच बातचीत सम्पन्न होने के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि वे भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में सुधार एवं विकास का समर्थन करते हैं और दक्षिण एशिया से संबंधित मुद्दों पर सहयोग, बातचीत एवं संवाद को मजबूत करने तथा उस क्षेत्र में शांति, स्थिरता एवं विकास के संवर्धन के लिये तैयार हैं।

रोमर ने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है शांतिपूर्ण और समद्ध चीन का उत्थान हो और साथ ही अमेरिका और भारत के बीच ऐतिहासिक करीबी रिश्ते रहें।

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